Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    गंगा हमारी मां…मुर्गा-टांग फेंकने की इजाजद किसने दी?:झांसी में बेबी रानी बोलीं- अखिलेश यादव को हिंदुओं की चिंता नहीं, सिर्फ वोटबैंक की फिक्र

    3 hours ago

    1

    0

    झांसी में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने अखिलेश यादव के ‘नाव पर इफ्तार पार्टी क्यों नहीं कर सकते?’ वाले बयान पर कहा- गंगा हमारी मां है। गंगा मां पर जाकर रोजा इफ्तार पार्टी करते, लेकिन मु़र्गे खा-खाकर टांगे फेंकने की इजाजत किसने दे दी? क्या इनकी मस्जिदों में जाकर जानवरों की हड्‌डी फेंक सकते हैं? इतने दंगे हो जाएंगे। अखिलेख यादव को हिंदुओं की आस्था की चिंता नहीं है। वे गलत बोल रहे हैं। अखिलेश यादव तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं। दरअसल शनिवार को मंत्री बेबी रानी मौर्य भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने पर दीनदयाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करके सरकार के कामों की जानकारी दी। देखें सभागार में आयोजित कार्यक्रम की तस्वीरें… 2017 से पहले क्या होता था सबको पता अखिलेश यादव के भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने पर बीजेपी के मुक्ति के समय वाले बयान पर मंत्री बेबी ने कहा- अखिलेश यादव और कांग्रेस को लगता होगा कि ये विध्वंश का दौर है। लेकिन ये प्रगति और उन्नति का दौर है। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी देश के लिए और मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के लिए काम कर रहे हैं, इससे पहले इतने कार्य कभी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले के आंकड़े देखिए। तब क्या होता था और अब क्या हो रहा है। ये सबको पता है। चुनाव नजदीक आते ही कांशीराम की जयंती मनाना चुनाव स्टंड है। उनको कांशीराम की याद पहले क्यों नहीं आई। इसी साल क्यों याद आई है? यूपी को नई पहचान मिली बेबी रानी मौर्य ने कहा- 9 साल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और माफियावाद खत्म हुआ है। 9 साल में उपद्रव से उत्सव, समस्या से समाधान और अविश्वास से आत्मविश्वास के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिली है। 2017 से पहले एजेंडा था कि जाति में बांटकर आपस में लड़ाई कराते रहो। जिससे प्रदेश की उन्नति नहीं हो पाई थी। दंगे, माफियाराज, वन डिस्टिक वन माफिया, गुंडा टैक्स, अवैध वसूली होती थी। सत्ता के संरक्षण में गुंडा-माफिया पलते थे और एक समांतर से सरकार चलाते थे। न महिलाएं सुरक्षित थी, न ही व्यापारी सुरक्षित था। मगर मुख्यमंत्री योगी की अगुवाई में यूपी में भयमुक्त समाज की स्थापना हुई है। यूपी उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बना है। सरकार बनने के बाद हमारी पहली प्राथमिकता अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरा टोलरेंस की नीति अपनाई। 2017 से पहले दंगे अक्सर होते थे, लेकिन 2017 के बाद 9 साल में कोई दंगा नहीं हुए। व्यापारी भी शाम 6 बजे बाद अपनी दुकान आराम से बैठकर चलाता है। महिलाएं भी सुरक्षित है। निवेश के नए रास्ते खुले। इससे उत्तर प्रदेश लगातार उन्नति की ओर बढ़ रहा है। जाने बेबी रानी मौर्य के बारे में… घर लाने से पहले ही बांट देती थी पूरा राशन बेबी बचपन से ही एक संपन्न परिवार से थीं। उनके पिता की जूते की फैक्ट्री और कई बीघा खेत थे। उनके घर के पास की बस्ती में गरीब लोग रहते थे। तो बेबी के खेत से जो भी खाने का सामान आता था, वो पहले बस्ती के सभी लोगों में बांटती थीं, उसके बाद जो बचा वो अपने घर लाती थीं। बचपन से ही लोगों की सेवा करना उनकी आदतों में शामिल हो चुका था। पति से बोलीं- “मुझे चुनाव लड़ना है” साल 1990 में बेबी की शादी बैंक अधिकारी प्रदीप कुमार मौर्य से हुई। शादी के 5 साल तक वो राजनीति में सक्रिय नहीं थीं। साल 1995 में उस समय आगरा मेयर की सीट महिला के लिए रिजर्व हुई थी। बेनी रानी मौर्य ने अपने ससुराल के लोगों और अपने पति से कहा- “मुझे चुनाव लड़ना है”। सब लोग मान गए। यही वो समय था, जब बेबी ने राजनीति में अपना पहला कदम रखा। लड़ेंगे तो बीजेपी से ही बेबी के पिता कांग्रेसी थे, लेकिन ससुर संघ से थे। उन्होंने राजनीति में आने से पहले ही सोच लिया था कि चुनाव लड़ेंगी तो बीजेपी से ही। संयोग की बात थी कि उस समय बीजेपी भी आगरा के लिए मेयर प्रत्याशी ढ़ूंढ रही थी। तो उनकी नजर बेबी पर पड़ी और बात आगे बढ़ गई। आगरा की पहली महिला मेयर बनने से शुरू हुआ राजनीतिक सफर साल 1995: बेबी बीजेपी में शामिल हुईं। आगरा से मेयर बनीं। साल 1997: भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति मोर्चा की कोषाध्यक्ष रहीं। साल 2001: राज्य सामाजिक कल्याण बोर्ड के सदस्य के रूप में काम किया। साल 2002: राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य के तौर पर भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। पहली बार चुनाव लड़ीं, हार गईं 2007 में उन्होंने आगरा की एत्मादपुर सीट से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। इसके बाद साल 2019 में उन्हें उत्तराखंड का गवर्नर बनाया गया। फिर वो उत्तराखंड की दूसरी महिला राज्यपाल भी बनी। ……………… ये भी जरूरी खबर… मथुरा में साधु की मौत पर हंगामा, पथराव:पुलिस की गाड़ियां तोड़ीं; आरोप- गोतस्करों ने ट्रक से कुचला, पुलिस बोली- हादसा मथुरा में साधु चंद्रशेखर सिंह (45) की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। वह ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से मशहूर थे। घटना के बाद जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए लोगों ने बाबा का शव रखकर हाईवे जाम कर दिया। बाबा के एक साथी ने दावा किया- शनिवार तड़के बाबा 2 साथियों के साथ ट्रक का पीछा कर रहे थे। ट्रक में गोवंश होने की सूचना थी। ट्रक को ओवरटेक कर बाबा ने सामने बाइक खड़ी कर दी। तभी अचानक ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचलते हुए भाग गया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, हादसे के बाद एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें बाबा जमीन पर पड़े हैं और उनके पास म्यान के साथ एक तलवार भी पड़ी है। जबकि, राजस्थान नंबर का ट्रक के आगे का हिस्सा डैमेज दिख रहा है। पढ़ें ये भी जरूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    BSC छात्र के हत्यारोपी को टांगकर ले गई पुलिस:नाम में माफिया लगाता है; काशी के कॉलेज में हत्या का VIDEO
    Next Article
    भाई से विवाद में युवक ने खुद को लगाई आग:बचाने आई मां भी झुलसी, गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment