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    ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के साथ खतरे में 'पिका':2050 तक तापमान बढ़ने से बदलना होगा घर, 6 प्रजातियों में से रॉयली पर सबसे ज्यादा असर

    13 hours ago

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    हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में चट्टानों के बीच रहने वाला छोटा-सा पिका अब वैज्ञानिकों के लिए सिर्फ एक पहाड़ी जीव नहीं रह गया है। मौसम में हो रहे बदलावों का असर समझने के लिए इसकी निगरानी की जा रही है। नए अध्ययन में सामने आया है कि हिमालय में बढ़ता तापमान पिका की अलग-अलग प्रजातियों के रहने की जगह बदल सकता है। कुछ इलाकों में पिका के रहने की जगह कम हो सकती है, जबकि कुछ प्रजातियों को ठंडे इलाकों की तलाश में और ज्यादा ऊंचाई की ओर जाना पड़ सकता है। सबसे ज्यादा चिंता रॉयली पिका को लेकर सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसके लिए आने वाले वर्षों में उपयुक्त इलाका कम होने का खतरा है। देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के वैज्ञानिकों ने चार हिमालयी पिका प्रजातियों पर यह अध्ययन किया है। इसमें वर्ष 2050 और 2070 तक बदलते मौसम के बीच इन प्रजातियों के रहने के लिए उपयुक्त इलाकों का अनुमान लगाया गया। अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स में पब्लिश हुआ है। पहले समझिए... पिका क्या होता है? पिका खरगोश जैसा दिखने वाला छोटा स्तनपायी जीव है। यह खरगोश और खरहा की तरह ही लैगोमॉर्फा समूह से जुड़ा है, लेकिन इसका परिवार अलग है। यह शाकाहारी होता है और हिमालय के ऊंचे, ठंडे और कई जगह चट्टानी इलाकों में रहता है। पिका ठंडे मौसम में रहने के लिए अच्छी तरह अनुकूलित है। इसलिए तापमान, बारिश, बर्फ और आसपास उगने वाली वनस्पतियों में बदलाव का असर इस पर जल्दी पड़ सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे पहाड़ों में बदलते मौसम का संकेत देने वाला जीव मानते हैं। हिमालय बाकी इलाकों से ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा अध्ययन में सामने आया कि समुद्र तल से 4000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों का तापमान करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ा है। यह क्षेत्रीय औसत करीब 0.2 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक से दोगुने से भी ज्यादा है। हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में इस सदी के अंत तक तापमान में 2.6 से 4.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी का अनुमान है। बढ़ती गर्मी का मतलब सिर्फ तापमान बढ़ना नहीं है। बर्फ कितने समय तक रहती है, बारिश कब और कितनी होती है और पहाड़ों में पौधों के बढ़ने का समय कितना बदलता है, इन सभी चीजों का असर पिका के जीवन पर पड़ सकता है। 2050 और 2070 में क्या हो सकता है? वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग परिस्थितियों को मानकर 2050 और 2070 के मॉडल तैयार किए। एक स्थिति में प्रदूषण और गर्मी बढ़ने की रफ्तार अपेक्षाकृत कम मानी गई, जबकि दूसरी में ज्यादा बढ़ोतरी की स्थिति को देखा गया। इसके साथ यह भी जांचा गया कि अगर पिका अपने मौजूदा इलाके से किसी दूसरे ठंडे और उपयुक्त इलाके तक पहुंच सके तो उसकी स्थिति कैसी होगी। दूसरी तरफ यह भी देखा गया कि अगर वह आसानी से दूसरी जगह नहीं जा पाए तो क्या असर होगा। यहीं से एक अहम बात सामने आई। सिर्फ नया ठंडा इलाका मिलना काफी नहीं है, पिका का वहां तक पहुंच पाना भी जरूरी है। अगर पहाड़ों के बीच उसके मौजूदा और नए इलाकों के बीच रास्ता नहीं बचा, तो वह बदलते मौसम के साथ अपना ठिकाना नहीं बदल पाएगा। इसलिए वैज्ञानिकों ने पिका के अलग-अलग इलाकों के बीच प्राकृतिक संपर्क बनाए रखने को बेहद जरूरी बताया है। पिका छोटा लेकिन भूमिका अहम इससे साफ है कि पहाड़ गर्म होने पर सभी पिका प्रजातियां एक ही तरह से प्रभावित नहीं होंगी। किसी के लिए जगह कम होगी, तो किसी को ज्यादा ऊंचाई पर नए इलाके मिल सकते हैं। पिका छोटा जरूर है, लेकिन हिमालय के ऊंचे इलाकों के लिए इसकी भूमिका बड़ी है। यह ठंडे और चट्टानी पहाड़ी इलाकों में रहने वाला शाकाहारी जीव है और मौसम में बदलाव के प्रति संवेदनशील है। इसलिए पिका की संख्या और उसके रहने की जगह में बदलाव वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकता है कि हिमालय में तापमान, बारिश, बर्फ और वनस्पतियों में कितना बदलाव हो रहा है। ------------------- यह भी पढ़ें भास्कर एक्सक्लूसिव : उत्तराखंड में 11% कम हुई बर्फ, तेजी से फैले शहर:जहां कंक्रीट वहां ज्यादा गर्मी, पानी-खेती से पर्यटन तक बढ़ी चुनौती उत्तराखंड को बर्फीली चोटियों, घने जंगलों और नदियों के राज्य के रूप में देखा जाता है, लेकिन पिछले 30 साल में इसकी जमीन की तस्वीर तेजी से बदली है। 1992 से 2022 के बीच बर्फ का क्षेत्र घटा, प्राकृतिक वनस्पति कम हुई और निर्मित क्षेत्र करीब 13 गुना बढ़ गया। इसी दौरान बारिश और तापमान के पैटर्न में भी बदलाव दिखाई दिया। (पढ़ें पूरी खबर)
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