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    गोरखपुर की जाफरा बाजार मस्जिद में लगा किताबों का स्टॉल:रमजान में बच्चों को मिलीं मुफ्त किताबें, लोगों ने दिखाई खूब रुचि

    1 hour ago

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    गोरखपुर में रमजान के महीने में लोगों को किताबों से जोड़ने के लिए सब्जपोश हाउस मस्जिद में किताबों का स्टॉल लगाया गया। तरावीह नमाज के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे और बड़े स्टॉल पर पहुंचे और किताबों में रुचि दिखाई। यह कार्यक्रम अल कलम एसोसिएशन की ओर से किया गया। अवाम के सहयोग से बच्चों को मुफ्त किताबें भी दी गईं। संयोजक मुजफ्फर हसनैन रूमी ने कहा कि किताबें इंसान को सही रास्ता दिखाती हैं और अच्छे गुण सिखाती हैं। इन किताबों को पढ़ने से ईमानदारी, धैर्य और दया जैसे गुण बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है, वैसे ही मन और आत्मा के लिए किताबों का अध्ययन जरूरी है। स्टॉल लगाने में इन लोगों ने किया सहयोग… किताबों का स्टॉल लगाने में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, हाफिज रहमत अली निजामी, आसिफ महमूद, हस्सान, शाबान, अब्दुस्समद, सफियान, जीशान, जावेद, रूशान और शहनवाज ने सहयोग किया। तरावीह में मुकम्मल हुआ कुरआन सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में तरावीह नमाज के दौरान हाफिज रहमत अली निजामी ने एक कुरआन मुकम्मल किया। इस मौके पर उन्हें तोहफे दिए गए और नमाजियों का गुलाब के फूलों से स्वागत किया गया। वहीं हुसैनी जामा मस्जिद बड़गो में हाफिज आरिफ रजा और नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में कारी सफीउल्लाह ने भी तरावीह में एक-एक कुरआन मुकम्मल किया। जानें रमजान में इबादत और मदद का महत्व… कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि रमजान का महीना इबादत और जरूरतमंदों की मदद करने का समय है। रोजा रखने से इंसान को भूख-प्यास का एहसास होता है, जिससे गरीबों की तकलीफ समझ में आती है। रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232 और 7860799059 पर रोजे और नमाज से जुड़े सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं। उलमा ने बताया कि इशा की फर्ज नमाज के बाद ही तरावीह पढ़ना चाहिए। एनीमा लगवाने से रोजा टूट जाता है, जबकि रोजे में आंखों में लेंस लगाने से रोजे पर कोई असर नहीं पड़ता।
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