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    गोरखपुर कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं:चेकिंग हुई तो एक बाल्टी बालू रखा, पतली सीढ़ी से चढ़ते- उतरते छात्र

    4 hours ago

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    गोरखपुर के शाही मार्केट स्थित ब्रॉडवे इंफोसिस कंप्यूटर इंस्टीट्यूट्स में फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं मिले। दो फ्लोर पर चलने वाले इस इंस्टीट्यूट में केवल एक ही फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद था। हालांकि बाद में चार और मंगाए गए। वहीं जब चेकिंग शुरू हुई तो एक-एक बाल्टी बालू और पानी आग बुझाने के लिए रख दिया गया। इसके अलावा बिल्डिंग में न तो कोई एग्जिट गेट और नहीं फायर अलार्म, स्प्रिंकलर या अन्य कोई इक्विपमेंट की व्यवस्था थी। सबसे बड़ी बात ग्राउंड फ्लोर से ऊपर चढ़ने के लिए एक पतली सी सीढ़ी थी। फर्स्ट फ्लोर पर तमाम दुकानें संचालित हो रही और सेंकेंड और थर्ड फ्लोर पर कम्प्यूटर की क्लास चलती है। आग लगने पर पूरे फ्लोर पर तुरंत भरेगा धुंआ दोनों फ्लोर पर एक-एक क्लासरूम है। जिसमें लगभग 15 से 20 सिस्टम लगे हुए हैं। एक साथ यहां लगभग 20 बच्चे क्लासेस लेते हैं। इस बिल्डिंग में क्लासरूम के आगे एक गैलरी जितनी ही जगह है। आग जैसा हादसा होने पर धुंआ तुरंत पूरे फ्लोर पर भर सकता है। जिससे घुटन और कुछ दिखाई न देने की भारी समस्या होगी। इस स्थिति में खुद को संभालना ही मुश्किल हो जाएगा, भाग कर निकलना तो दूर की बात है। भगदड़ मचने भी संभावना क्लासरूम में कोई एग्जिट गेट नहीं है। सिर्फ एक ही गेट है जिससे ऐसी स्थित में जल्दी से बाहर निकलने से भगदड़ मचने की भी संभावना है। सीढ़ियों से गिरने और बीच रास्ते में फंस जाने का भी पूरा चांस है। बेहद ही व्यस्तम एरिया में हो रहा संचालन दूसरी सबसे बड़ी कमी है कि यह इंस्टीट्यूट एक ऐसी लोकेशन पर चल रहा है जो एक बहुत ही व्यस्तम एरिया है। इंस्टीट्यूट के ठीक नीचे वाले फ्लोर से लेकर ग्राउंड फ्लोर और आसपास के हर जगह इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें चलती हैं। रास्ते में खड़ी रहती गाड़ियां रोजाना यहां सैकड़ों खरीदारों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे में दुकानदार और खरीदार दोनों की गाड़ियां भी बीच रास्ते में खड़ी पाई जाती हैं। शाही मार्केट के मेन गेट से लेकर अंदर तक सिर्फ आने- जाने का रास्ता छोड़कर सभी के बाइक खड़े करते हैं। आग फैलने का पूरा चांस दुकानें एक दूसरे से सटी हुई हैं। ऐसे में एक जगह आग लगने से पूरे मार्केट में जल्द- जल्द आग फैल सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान होने की वजह से आग भयावह रूप भी ले सकता है। ऐसी जगह पर इंस्टीट्यूट चलाना ही बेहद जोखिम भरा है। रास्ते में खड़ी गाड़ियों की वजह से एक साथ ज्यादा लोगों को बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। भगदड़ मचने से स्थिति पर काबू पाना बेहद ही मुश्किल काम होगा। ओनर बोले- जल्द दूर की जाएंगी कमियां लखनऊ अग्निकांड के बाद दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह सब कमियां सामने आई। बुधवार को टीम ने जब ओनर प्रभाकर पांडेय से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि हमारे पास एक फायर एस्टिंग्सविशर पहले से मौजूद था, चार और मंगा लिए गए हैं। एग्जिट गेट बनाने की तैयारी इसे हर जगह लगाया जाएगा। साथ ही एग्जिट गेट के लिए बिल्डिंग के ओनर से बात हो गई है। उन्होंने भी इस बात को गंभीरता से लेते हुए एग्जिट गेट बनाने के लिए जगह देख ली है। एक से दो दिन के अंदर काम शुरू हो जाएगा। क्लासरूम के बाहर रखीं पानी और बालू से भरी बाल्टियां साथ ही छोटी- मोटी आग पर काबू पाने के लिए क्लासरूम के बाहर हमने बालू और पानी से भरी हुई बाल्टियों के इंजाम भी किए हैं। जिससे कोई भी व्यक्ति तुरंत आग पर काबू पा सके। इसके अलावा फायर अलार्म और अन्य इक्विपमेंट की व्यवस्था भी जल्द से जल्द किया जाएगा। बिल्डिंग की फायर NOC लेने की भी बात चल रही है। लखनऊ अग्निकांड के बाद हमारी भी आंखें खुली हैं। हम अपने स्टूडेंट्स की जिंदगी को लेकर कोई लापरवाही नहीं करना चाहता। फायर सेफ्टी के इंतजाम हमारी प्राथमिकता हैं।
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