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    गोरखपुर में बिजली कर्मियों का आंदोलन तेज:आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग, 20 फरवरी को प्रदर्शन

    23 hours ago

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    गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन और उसके सभी डिस्कॉमों को नवगठित आउटसोर्स सेवा निगम के प्राविधानों में शामिल करने की मांग उठाई है। समिति का कहना है कि इससे आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी। संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा शासन को भेजे गए उस पत्र का विरोध किया है, जिसमें कॉर्पोरेशन को आउटसोर्स सेवा निगम से अलग रखने की बात कही गई है। गोरखपुर में उठी शोषण के खिलाफ आवाज संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन में आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ लंबे समय से भेदभाव और शोषण हो रहा है। वर्षों से काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को नियमितीकरण या समायोजन का लाभ नहीं मिल रहा है और समान कार्य के बावजूद वेतन में भारी असमानता बनी हुई है। श्रम कानूनों के पालन की मांग समिति ने कहा कि कई मामलों में श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए कर्मचारियों को बोनस, अवकाश और अन्य वैधानिक सुविधाएं नहीं दी जा रहीं। वहीं ठेकेदारों को अनावश्यक वित्तीय लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण बढ़ रहा है। संघर्ष समिति के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों से लाइनमैन, उपकेंद्र संचालन और कंप्यूटर संचालन जैसे तकनीकी और जोखिमपूर्ण कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही। इसके चलते दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है और कई कर्मचारी असमय मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं। मनमानी कार्रवाई का आरोप समिति ने कहा कि कई वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को मनमाने तरीके से सेवा से हटाया गया है, जो श्रम कानूनों के विरुद्ध है। साथ ही जांच रिपोर्टों के बावजूद ईपीएफ जैसी मदों में अनियमितता करने वाले ठेकेदारों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। संघर्ष समिति ने सरकार से पावर कॉर्पोरेशन और सभी डिस्कॉमों को आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाने, आउटसोर्स कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन और सुविधाएं देने, श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराने, ठेकेदारों की अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई करने और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करने की मांग की है। 20 फरवरी को गोरखपुर में प्रदर्शन संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 450 दिन पूरे होने पर 20 फरवरी को गोरखपुर सहित प्रदेशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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