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    गोरखपुर में बिजली व्यवस्था पर संकट की चेतावनी:कर्मचारियों में संविदा कर्मियों की छंटनी बढ़ी चिंता, निजीकरण की तैयारी का लगाया आरोप

    11 hours ago

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    गोरखपुर में बिजली व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के संगठन ने बड़ा आरोप लगाया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि गर्मियों से पहले बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है और नियमित कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अभियंताओं को निलंबित किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। संघर्ष समिति के अनुसार इस बार गर्मियों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। केंद्रीय स्तर के आकलन के मुताबिक देश में मांग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले साल यह 243 गीगावाट थी। इसी तरह प्रदेश में भी मांग 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़कर करीब 36 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। ऐसे समय में अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाना व्यवस्था को कमजोर कर सकता है। प्रदेशभर में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन इन फैसलों के विरोध में प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्णयों को वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने बताया कि 11 अप्रैल को लखनऊ में सभी घटक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इसमें प्रबंधन की नीतियों, कर्मचारियों पर हो रही कार्रवाई और आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। निजीकरण की तैयारी का आरोप संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर बिजली व्यवस्था को कमजोर कर रहा है ताकि बाद में निजीकरण को सही ठहराया जा सके। कई शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है। संघर्ष समिति के अनुसार लखनऊ में 340, अयोध्या में 52 और मेरठ में 193 संविदा कर्मियों को हटाया गया है। कई जगहों पर जहां पहले 36 कर्मचारी तैनात थे, वहां अब केवल 9 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं, जिससे व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। पहले से तय मानक भी घटाए गए समिति ने बताया कि पहले शहरी क्षेत्रों में एक सबस्टेशन पर 36 और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों की व्यवस्था थी, जिसे घटाकर क्रमशः 18.5 और 12.5 कर दिया गया है। इसके चलते प्रदेशभर में करीब 2500 संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि छंटनी और कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं रोकी गई तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। समिति के अनुसार निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन अब 491वें दिन में पहुंच चुका है और लगातार जारी है।
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