Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    राघव चड्ढा कैसे बन गए Gen Z के फेवरेट सांसद? जिनके सफर को कहा जा रहा मॉर्डन इंडियन पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा Lession

    3 hours from now

    2

    0

    एक नेता की कहानी जो दिल्ली की झाड़ू क्रांति से निकला। ऑक्सफोर्ड में पढ़ा, सीए किया और जब उसके सबसे चहेते नेता को ईडी ने उठाया। जब पूरी पार्टी सड़क पर थी, नेता की पत्नी अकेले लड़ रही थी, तब यह नेता लंदन में थे। कहानी उनकी गैर हाजिरी और हाजिर होने में फर्क की। पार्टी में होकर ना होने के फर्क की और इन सबके बीच जनता का सबसे चहेता पार्लियामेंटेरियन बन जाने की।दिल्ली के रामलीला मैदान के इंकलाबी शोर से शुरू हुआ राघव चड्ढा का सफर आज देश की संसद तक जा पहुँचा है। राजनीति में कदम रखने से पहले, राघव आंकड़ों के जादूगर थे। महज 22 साल की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का लाइसेंस हासिल करने वाले राघव उस दौर में भी देश के उच्चतम टैक्स ब्रैकेट (30%) में आते थे। आम आदमी पार्टी (AAP) के उभार के साथ राघव की कहानी एक ऐसे विदेश से शिक्षित प्रोफेशनल की कहानी है, जिसने एयर-कंडीशनर दफ्तरों को छोड़कर तपती राजनीति को चुना। उन्हें एक 'टेक्नोक्रेट राजनेता' के रूप में देखा जाता है, जो जटिल नीतियों को भी उतनी ही सहजता से समझते हैं जितनी सहजता से वे चुनावी गणित बिठाते हैं। छात्रों के लिए कर्ज राहत और उनके हक की आवाज बुलंद करने वाले राघव आज युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त मौजूदगी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी बेबाक राय ने उन्हें 'Gen Z का फेवरेट सांसद' बना दिया है।ऑक्सफोर्ड में पढ़ा, सीए किया चड्ढा का जन्म 1988 में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नई दिल्ली में प्राप्त की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। चड्ढा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) बनने का विकल्प चुना और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से इसकी पढ़ाई की। उन्होंने महज 22 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल की। ​​इसके बाद, उन्होंने बहुराष्ट्रीय ऑडिट कंसल्टिंग फर्मों, डेलॉइट और थॉर्नटन में काम किया। चड्ढा ने 2011 में अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन में भाग लेकर राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत की।अन्ना आंदोलन से राज्यसभा सांसद तकवो दौर याद है 2015 का बरस दिल्ली की सड़कों पर झाड़ू वाली क्रांति चल रही थी और उस क्रांति के हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में हर रैली में एक तेजतर्रार लड़का खड़ा रहता था दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ठीक पीछे या बगल में। ऑक्सफोर्ड से पढ़कर आया था यह चार्टर्ड अकाउंटेंट। सबको अपनी ओर आकर्षित कर रहा था और जुबान इतनी पहनी कि बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं को तिलमिला दे रहा था। केजरीवाल की तरकश का मजबूत तीर राघव चड्ढा पार्टी का सबसे मार्केटेबल चेहरा जिसे आपने आगे किया टीवी डिबेट्स के लिए युवाओं को अट्रैक्ट करने के लिए और इंग्लिश स्पीकिंग इंडिया को इंप्रेस करने के लिए।  राघव चड्ढा ने 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम किया, जिन्होंने बाद में आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया। एक कार्यकर्ता के रूप में चड्ढा ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में आंदोलन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। यहीं से चड्ढा ने वित्त पेशेवर से कार्यकर्ता बनने का सफर तय किया। जल्द ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा। चड्ढा 2012 में आम आदमी पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके सदस्य हैं। उनका पहला राजनीतिक कार्य अरविंद केजरीवाल के लिए दिल्ली लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करना था। चड्ढा आम आदमी पार्टी के और सभी दलों में सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। अपनी वाक्पटुता के दम पर वे टेलीविजन पर बेहद लोकप्रिय हो गए। 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को बहुमत मिलने के बाद, चड्ढा को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। उस समय उनकी उम्र मात्र 26 वर्ष थी। हालांकि, अप्रैल 2018 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान, दिल्ली के मंत्री मनीष सिसोदिया के सलाहकार के रूप में उनकी भूमिका समाप्त कर दी गई। गृह मंत्रालय ने तब कहा था कि ये नियुक्तियां केंद्र सरकार की अनिवार्य पूर्व स्वीकृति के बिना की गई थीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में, चड्ढा ने दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। उन्हें भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने बुरी तरह हरा दिया। बाद में 2020 में चड्ढा को 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया, जहाँ पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ​​उत्तरी राज्य में पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतीं। उसी वर्ष, 2020 में, चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजेंद्र नगर से चुनाव लड़ा और भाजपा उम्मीदवार आरपी सिंह को 20,058 वोटों के अंतर से हराकर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज की। उन्हें कुल वोटों का 57.06% प्राप्त हुआ। अपनी जीत के बाद, उन्हें दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।सियासत में बॉलीवुड का तड़का2022 में आम आदमी पार्टी (आप) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा भेजा। 33 वर्ष की आयु में उनकी नियुक्ति ने उन्हें भारत का सबसे युवा राज्यसभा सांसद बना दिया। उन्होंने आप के संसदीय कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली शराब नीति मामले में संजय सिंह के जेल जाने के बाद, आप ने 2023 में उन्हें राज्यसभा में पार्टी का नेता नियुक्त किया। बाद में 2024 में रिहा होने के बाद संजय सिंह को सदन में वापस आने पर फिर से नेता नियुक्त किया गया।राघव की कहानी सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित नहीं है; इसमें बॉलीवुड की चमक और रोमांस का तड़का भी लगा है। मशहूर अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के साथ उनकी शादी ने इस राजनीतिक सफर को एक फिल्मी मोड़ दे दिया, जिससे वे देश के सबसे चर्चित 'पावर कपल्स' में शुमार हो गए। जेन जी की पसंदराज्यसभा में अपने कार्यकाल के दौरान ही चड्ढा ने छात्रों और दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं को उठाया था। छात्रों के कर्ज पर दिए गए उनके संसदीय भाषण बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए और सोशल मीडिया पर युवा पीढ़ी ने उनकी खूब प्रशंसा की। कुछ लोगों ने तो उन्हें मध्यम वर्ग की समस्याओं को उठाने के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ सांसद तक कह दिया। राघव चड्ढा ने राजनीति से परे भी व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है। इंस्टाग्राम पर 123 लाख फॉलोअर्स, आकर्षक थंबनेल और वायरल क्लिप्स के साथ, सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत उपस्थिति है। जनकेंद्रित भाषण और रोजमर्रा के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण वे युवा दर्शकों के बीच इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि वे किसी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से कम प्रभावशाली नहीं लगते। अब अप्रैल 2026 में आप और उसके शीर्ष नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर चड्ढा की लगातार चुप्पी के बीच, पार्टी ने उन्हें उच्च सदन के महत्वपूर्ण पद से हटाने की सिफारिश की है। पहले भी, चड्ढा को पार्टी मामलों से दूरी बनाए रखने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। शराब घोटाले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद, चड्ढा ने अपनी विलंबित प्रतिक्रिया के लिए ब्रिटेन में हुई नेत्र शल्य चिकित्सा से ठीक होने का हवाला दिया था। अब बात करते हैं 2026 की। फरवरी में दिल्ली की एक अदालत द्वारा पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में बरी किए जाने के बाद चड्ढा ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चड्ढा को हटाए जाने पर पार्टी ने भले ही यह कहा हो कि "सभी को अवसर मिलने चाहिए", लेकिन इस संभावना को नजरअंदाज करना मुश्किल है कि जनरेशन जेड के चहेते सांसद आम आदमी पार्टी के उच्च कमान के नजरिए से गिर गए हों। चड्ढा को हटाना आंतरिक फेरबदल है या कुछ और, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट हो जाएगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    'अमेरिका से लड़ने के लिए तैयार हैं 70 लाख ईरानी', जानिए अब किसने ने डोनाल्ड ट्रंप को चेताया?
    Next Article
    Iran-US War: ट्रंप बर्रे के छत्ते में हाथ डाल भागे उल्टे पांव... अब होर्मुज को खुलवाने के लिए भारत भी लगाएगा जोर, प्लानिंग में कौन-कौन देश शामिल?

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment