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    गोरखपुर में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन:आंदोलन के 450 दिन पूरे, फैसला वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा

    8 hours ago

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    गोरखपुर में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 450 दिन पूरे हुए। इस मौके पर शुक्रवार को बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने शहर में प्रदर्शन कर निजीकरण का निर्णय वापस लेने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मियों ने भाग लिया और कहा कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं होगा, आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक रूप से जारी रहेगा। उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग संघर्ष समिति गोरखपुर के पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले 450 दिनों से कर्मचारी पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष है। उन्होंने मांग की कि निजीकरण की वापसी के साथ आंदोलन के दौरान की गई सभी कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए। समिति ने कहा कि आंदोलन के बावजूद कर्मचारी बिजली व्यवस्था सुचारु बनाए रखते हुए किसानों और आम उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता पर कर रहे हैं, ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो। उपभोक्ताओं और किसानों पर बुरे असर की आशंका पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण से किसानों और आम उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। इससे बिजली दरों में बढ़ोतरी, सेवा गुणवत्ता में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। आंदोलन के 450 दिन पूरे होने पर कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं और किसानों से संपर्क कर उन्हें निजीकरण के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। संघर्ष समिति ने दोहराया कि यह आंदोलन उपभोक्ताओं के हित, किसानों के भविष्य और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए है और निजीकरण की वापसी तक संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके पर पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन, सीबी उपाध्याय, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, ब्रजेश त्रिपाठी, कृष्णमोहन, रोशन कुमार, राम भजन, धनंजय राजभर, जितेन्द्र, अजीत, जुल्फिकार और राकेश चौरसिया उपस्थित रहे।
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