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    गोरखपुर में सफाई मित्र सुरक्षा की अनदेखी:नाले में उतरकर सफाई करते दिखे कर्मचारी, नगर आयुक्त बोले- ये हमारे वर्कर नहीं

    1 hour ago

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    गोरखपूर में रविवार को शहर के विष्णुपुरम इलाके में सेम्पवेल की सफाई के दौरान सफाई कर्मी कमर से ऊपर तक सीवर के गंदे पानी में उतरकर मैनुअल तरीके से सफाई करते नजर आए। इस दौरान उनके पास कोई भी सुरक्षा के उपकरण नहीं दिखाई दिए। स्वच्छता को लेकर गोरखपुर शहर में बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में गोरखपुर को ‘सफाई मित्र सुरक्षित शहर’ की श्रेणी में देश में तीसरा स्थान और गारबेज फ्री सिटी श्रेणी में 5-स्टार रेटिंग मिल चुकी है। अब नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में गारबेज फ्री सिटी में 7-स्टार रेटिंग पाने का दावा कर रहा है। देखिए 2 तस्वीरें गले तक गंदे पानी में उतरकर की सफाई विष्णुपुरम में सेम्पवेल की सफाई के दौरान सफाई कर्मचारी गले तक नाले के गंदे पानी में उतरकर कचरा निकालते दिखाई दिए। यह काम पूरी तरह मैनुअल तरीके से किया जा रहा था। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सफाई कर रहे कर्मचारियों के पास कोई भी जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं था। न तो उनके पास हेलमेट था, न मास्क, न दस्ताने और न ही गमबूट। ऐसे में वे सीधे सीवर के दूषित पानी के संपर्क में आकर काम कर रहे थे, जिससे गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सुप्रीम कोर्ट और आयोग का सख्त निर्देश सीवर और नालों की सफाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छता आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सीवर, नाले और सेम्पवेल की सफाई केवल मशीनों और उपकरणों से ही की जाए। किसी भी स्थिति में मैनुअल सफाई की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे सफाई कर्मचारियों की जान को खतरा रहता है। इसके बावजूद शहर में ऐसे दृश्य सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। सुरक्षा गियर का होना जरूरी सफाई कर्मचारियों के लिए काम के दौरान सुरक्षा गियर अनिवार्य माना गया है। इसमें हेलमेट, मास्क, दस्ताने, सुरक्षा जैकेट और गमबूट शामिल होते हैं। ये उपकरण कर्मचारियों को जहरीली गैस, गंदे पानी और संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारियों के पास इनमें से कोई भी सुरक्षा साधन नहीं दिखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि नगर निगम की ओर से नाला और नालियों की सफाई मड पम्प, सक्शन मशीन और छोटी-बड़ी पोकलेन मशीनों की मदद से कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जहां मशीन नहीं पहुंच पाती, वहां मैनुअल सफाई कराई जाती है। कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि- तस्वीरों में दिख रहा व्यक्ति पहली नजर में नगर निगम का कर्मचारी नहीं लग रहा है। संभव है कि सेम्पवेल के ऑपरेटर ने अपने किसी निजी कर्मचारी से सफाई कराई हो। मामले की जानकारी संबंधित सुपरवाइजर को दे दी गई है और यदि कोई नगर निगम का कर्मचारी नाला सफाई करने जाएगा तो उसे पूरी सुरक्षा के साथ ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर मशीन से हुई नाला सफाई उधर शहर के शाहपुर क्षेत्र में गीता वाटिका रोड पर नाला सफाई का काम मशीनों की मदद से तेजी से कराया गया। रविवार को यहां छोटे पोकलेन की सहायता से नाले और नालियों की सफाई कराई गई, जिससे कचरा निकालकर जल निकासी को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।
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