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    गोरखपुर–देवरिया–छपरा रेलखंड पर तीसरी-चौथी लाइन:रेलवे बोर्ड को भेजा गया प्रस्ताव; बढ़ते ट्रैफिक की जरूरतों को देखते हुए क्षमता विस्तार की योजना

    5 hours ago

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    देवरिया। पूर्वांचल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल गोरखपुर–देवरिया–छपरा मुख्य रेलखंड पर एक साथ तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है और जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम और व्यवस्थित होगा तथा भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और माल ढुलाई की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। यह रेल मार्ग पूर्वोत्तर रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त खंड माना जाता है। देवरिया जिले के गौरी बाजार, बैतालपुर, देवरिया शहर और भटनी जंक्शन जैसे प्रमुख स्टेशन इसी लाइन पर स्थित हैं। बाराबंकी–गोरखपुर–छपरा रेल लाइन पूर्वांचल को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों से जोड़ती है। यही वजह है कि इस रूट पर यात्रियों और मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन 100 से अधिक यात्री ट्रेनें और लगभग 30 मालगाड़ियों का संचालन होता है, जिससे लाइन क्षमता पर भारी दबाव बना रहता है। क्या है वर्तमान स्थिति, कहां तक हुआ काम गोरखपुर से सरदारनगर तक तीसरी लाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। सरदारनगर से बैतालपुर के बीच तीसरी लाइन का सर्वे भी पूरा हो गया है। बैतालपुर से देवरिया होते हुए भटनी तक फिलहाल केवल डबल लाइन संचालित है, जबकि भटनी से छपरा के बीच भी दोहरी लाइन ही मौजूद है। भटनी जंक्शन से वाराणसी जाने वाली लाइन का दोहरीकरण कार्य तेज़ी से जारी है और संभावना है कि मार्च तक यह पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या और गति दोनों बढ़ेंगी, जिससे मुख्य लाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय माना जा रहा है। त्योहारों में चरम पर पहुंच जाती है व्यस्तता होली, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान इस रेल मार्ग की व्यस्तता चरम पर पहुंच जाती है। स्पेशल ट्रेनों के लिए समय निर्धारित करना रेलवे अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है, क्योंकि सुबह और शाम दोनों समय ट्रेनों की लंबी कतार रहती है। हर आधे घंटे में एक ट्रेन गुजरने की स्थिति में यदि कोई ट्रेन थोड़ी भी लेट हो जाए तो पूरा टाइम-टेबल प्रभावित हो जाता है। ऐसे में तीसरी और चौथी लाइन को स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। नई ट्रेनों के संचालन की राह होगी आसान लाइन क्षमता बढ़ने से नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी। वर्तमान में कई प्रस्तावित ट्रेनों को केवल सीमित लाइन क्षमता के कारण स्वीकृति नहीं मिल पाती। रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत सर्वे और डीपीआर तैयार की जाएगी। क्षमता विस्तार से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे, माल ढुलाई सुचारु होगी और ट्रेनों का समयबद्ध संचालन संभव हो सकेगा। इस परियोजना को क्षेत्र के रेल परिवहन के लिए दीर्घकालिक “गेम-चेंजर” माना जा रहा है।
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