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    गैस की किल्लत से छात्रों का बजट गड़बड़:छात्र बोले- 4000 का सिलेंडर, बाहर का खाना महंगा; बाकी खर्च कैसे चलेगा

    3 hours ago

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    मेरा गैस सिलेंडर पिछले तीन-चार दिनों से खत्म हो गया है। अब बाहर से खा रहे हैं, कभी एक टाइम खा रहे हैं, क्योंकि बाहर दुकान में सिलेंडर 3000 से 4000 रूपए से कम में मिल ही नहीं रहा है। तो काफी दिक्कतें आ रही हैं। कभी आदमी ने एक टाइम नाश्ता कर लिया, कभी दोस्तों के रूम पर चला गया, लेकिन यह कब तक चलता रहेगा? यह तो कंटिन्यू हो नहीं सकता। ये कहना है प्रयागराज में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे अनिरूद्ध का जो गैस की किल्लत के वजह से परेशानी उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चार दिन से गैस खत्म है और घर से 4000 - 5000 रूपए आते हैं, जो लगभग सभी स्टूडेंट्स को मिलते हैं। लेकिन अब अगर 4000 का सिलेंडर ही ले लिया जाएगा, तो बाकी के खर्च कैसे चलेंगे? स्टूडेंट्स के लिए तो यह बहुत ही बड़ी समस्या है। अगर आदमी इसी सब में उलझा रहेगा तो पढ़ तो पाएगा नहीं, क्योंकि उसे एक मानसिक तनाव बना रहेगा। तो बस यही है कि अगर ये चीजें व्यवस्थित हो जाएं तो स्टूडेंट्स के साथ-साथ सभी के लिए आसानी हो जाएगी। प्रयागराज में किराए पर रहने वाले छात्रों की क्या हालत है? छात्र अब कैसे अपना गुजारा कर रहे हैं? गैस किल्लत की कीमत अब छात्रों को कैसे प्रभावित कर रही है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने छात्रों बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट….. 3 तस्वीरें देखिए… बजट मैनेजमेंट और डेली रूटीन मिर्जापुर के आयुष ने बताया कि कॉलेज स्टूडेंट हैं हम लोग, अगले महीने से एग्जाम भी है, तो फिर हम लोग को समस्याएं हो रही हैं। अब सुबह खाना वगैरह बनाने में दिक्कत हो रही है। गैस का जैसे तैये कहीं ब्लैक में भी मिल रहा है तो बहुत महंगा है। मतलब खरीद नहीं पा रहे और जल्दी मिल भी नहीं रहा है। दोस्त के यहां एक-दो दिन हम लोग रुके हुए थे, वहां पर कुछ मैनेज किए हैं, ये सारी समस्याएं हो रही हैं हमें। बाहर का खाना, टिफिन सर्विस महंगा बाहर का खाना और फिर टिफिन वगैरह का भी बढ़ चुके हैं तो फिर अब उसमें भी हमें समस्याएं हो रही हैं। घर से लोग बुला रहे हैं कि घर चले आओ, घर चले आओ लेकिन अब फिर उसमें घर जाएंगे तो पढ़ाई में दिक्कत आने लगेगी। ये सारी समस्याएं हम लोग के पास हैं। घर से पैसे तो लिमिटेड आ रहे हैं, बट अब क्या करें, अब यहां हैं तो किसी तरह एडजस्ट कर रहे हैं।अब सरकार से यही हम लोग का निवेदन है कि ये सब जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। नीट की तैयारी कर रहे अनुज प्रताप ने बताया कि मैं सुबह-सुबह चला जाता था कोचिंग, तो सुबह-सुबह खाना बना के जाना पड़ता था और शाम को 4:00 बजे आता था। तीन दिन से मैं कोचिंग नहीं जा पा रहा हूं। मुझे बहुत सारी समस्याएं फेस करनी पड़ रही हैं। जब मेरा गैस खत्म हुआ, तो मैंने फोन करके बात भी की गैस वालों से, तो उन्होंने कहा “भैया, गैस तो अभी कम से कम 15 दिन नहीं मिल पाएगी।” हम लोग का 3 मई को एग्जाम है NEET का। एज़ अ स्टूडेंट अगर हम लोग पढ़ाई भी करते हैं और इतनी बड़ी समस्या फेस करते हैं। यहां पर हमारा प्याज, आलू और जो भी है बर्तन, यहां सब सूख रहा है। घर वाले अलग बोल रहे हैं कि आप घर चले आइए। तो हम लोग यहां पे अब क्या करें? हम लोग अब यही कर सकते हैं कि यहां से मतलब अगर घर चले जाएंगे, 3 मई को एग्जाम है, उसमें सारी दिक्कतें आ जाएंगी। मिडिल क्लास का बच्चा होकर के अगर बाहर से खाना मंगाएगा... यहां 3000 का रूम, 3500 का रूम लेके मिडिल क्लास का बच्चा अगर बाहर रह के खाना खाएगा, तो वह कितने दिन चलेगा? पहली बात तो माता-पिता किसान हैं, वह कैसे भी करके पढ़ाते हैं और दो वक्त का गुजारा होता है। सोचते हैं कुछ कर ले जाएंगे, तो यहां बीच में अड़चनें आ जाती हैं। स्टूडेंटों का दर्द कोई नहीं समझता।
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