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    गांवों में लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और रोजगार की नई राह:गंगा एक्सप्रेस-वे से तीर्थ सर्किट हुआ मजबूत, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश में बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक हाईवे नहीं, बल्कि विकास और आस्था को जोड़ने वाला मेगा कॉरिडोर बनता जा रहा है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों के 500 से ज्यादा गांवों को जोड़ते हुए आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। गांवों की बदलेगी तस्वीर, बढ़ेगी कनेक्टिविटी अब तक जिन गांवों से शहरों तक पहुंचने में घंटों लगते थे, वहां एक्सप्रेस-वे बनने के बाद सफर तेज और आसान हो जाएगा। रायबरेली के हरचंदपुर-बछरावां, उन्नाव के सफीपुर, हरदोई के बिलग्राम और शाहजहांपुर के तिलहर जैसे इलाके सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर से जुड़ेंगे। इससे किसानों, छोटे व्यापारियों और युवाओं को बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। लॉजिस्टिक्स और कारोबार को मिलेगा बूस्ट एक्सप्रेस-वे के किनारे लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना है। हरदोई, उन्नाव और शाहजहांपुर जैसे जिलों के किसान अब अपनी उपज—फल, सब्जी, अनाज और डेयरी उत्पाद—लखनऊ, नोएडा और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक कम समय में पहुंचा सकेंगे। इससे परिवहन लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा। वहीं वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट से जुड़े नए व्यवसाय भी तेजी से उभरेंगे। रियल एस्टेट में बढ़ी हलचल एक्सप्रेस-वे के आसपास जमीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। रायबरेली, प्रतापगढ़, शाहजहांपुर और संभल के कई इलाकों में निवेशकों और डेवलपर्स की रुचि बढ़ी है। आने वाले समय में यहां होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, गोदाम और सर्विस सेंटर विकसित होंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। युवाओं को मिलेगा स्थानीय रोजगार निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को काम मिला है, लेकिन असली अवसर एक्सप्रेस-वे चालू होने के बाद सामने आएंगे। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, होटल, सर्विस सेक्टर और छोटे कारोबार में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। प्रयागराज, उन्नाव और रायबरेली के गांवों में अब पलायन कम होने की उम्मीद है। आस्था के कॉरिडोर को मिलेगी नई रफ्तार गंगा एक्सप्रेस-वे आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई दिशा देने जा रहा है। यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश के पांच प्रमुख स्पिरिचुअल कॉरिडोर को मजबूत करेगा, जिससे श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई तीर्थों के दर्शन कर सकेंगे। मेरठ से प्रयागराज तक यह मार्ग गढ़मुक्तेश्वर, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी शक्तिपीठ और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को आसान कनेक्टिविटी देगा। हर साल लाखों श्रद्धालु इन स्थानों पर आते हैं, जिन्हें अब बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। प्रमुख धार्मिक कॉरिडोर होंगे मजबूत प्रयागराज–विंध्याचल–काशी कॉरिडोर: संगम से विंध्याचल और काशी तक यात्रा तेज होगी। प्रयागराज–अयोध्या–गोरखपुर कॉरिडोर: रामभक्ति से जुड़े स्थलों को जोड़ेगा। प्रयागराज–लखनऊ–नैमिषारण्य कॉरिडोर: प्राचीन तपोभूमि नैमिषारण्य को बढ़ावा मिलेगा। प्रयागराज–राजापुर–चित्रकूट कॉरिडोर: रामायण से जुड़े स्थलों तक आसान पहुंच। प्रयागराज–मथुरा–वृंदावन कॉरिडोर: कृष्णभक्ति के प्रमुख केंद्रों को जोड़ेगा। “डेस्टिनेशन” से “सर्किट” की ओर बदलाव अभी तक श्रद्धालु एक ही तीर्थ तक सीमित रहते थे, लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी से वे एक यात्रा में कई धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। इससे पर्यटन की अवधि, खर्च और स्थानीय कारोबार तीनों बढ़ेंगे। एक्सप्रेस-वे के आसपास होटल, धर्मशाला, लोकल बाजार, ट्रांसपोर्ट और हस्तशिल्प जैसे छोटे व्यवसाय तेजी से विकसित होंगे। काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा और नैमिषारण्य जैसे तीर्थ आपस में बेहतर तरीके से जुड़कर उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन हब बना सकते हैं।
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