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    घूंघट करके कुश्ती खेलने उतरी महिलाएं:हमीरपुर में कजली पर्व पर अखाड़े में भिड़ीं बहू-बेटियां, अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा दंगल

    6 hours ago

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    यूपी के हमीरपुर के निवादा गांव में रक्षाबंधन के दूसरे दिन कजली पर्व पर महिलाओं का अनोखा दंगल हुआ। शनिवार को पारंपरिक दंगल में बहू-बेटियों ने घूंघट की आड़ में कुश्ती के दांव-पेच दिखाए। दंगल देखने सैकड़ों महिलाएं और युवतियां पहुंचीं। ढोल और थाप बजाकर पहलवानों का उत्साह बढ़ाती रहीं। दंगल में गांव की मालती शुक्ला ने माया गुप्ता को पटखनी दी। कौशिल्या ने मुलिया को गिराया, जबकि रामसखी ने शकुंतला को चित्त कर दिया। संपत सविता ने श्यामा पाल को हराया। विद्या सविता और मोहनी के मुकाबले में विद्या विजयी रहीं। वहीं रानी भुर्जी ने मीरा सविता को हराकर जीत दर्ज की। ग्रामीणों के मुताबिक, अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही इस पुरानी दंगल परंपरा में गांव की बहुएं और युवतियां साड़ी में घूंघट डालकर अखाड़े में उतरती हैं। इसके बाद महिला पहलवानों के बीच मुकाबले होते हैं। अखाड़े और उसके आसपास पुरुषों की एंट्री पूरी तरह रोक रहती है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजों के राज जब गांव के पुरुष अत्याचार से बचने के लिए इधर-उधर चले जाते थे। तब महिलाओं ने अपनी सुरक्षा के लिए कुश्ती के दांव-पेच सीखे थे। जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर निवादा गांव में सैंकड़ो साल से ये दंगल कराया जाता है। अब अनूठे दंगल का इतिहास पढ़िए ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और रिटार्य मैनेजर नाथूराम ने बताया- गांव के बुजुर्गों से सैंकड़ो साल पुरानी दंगल की परंपरा के बारे में सुनते आए हैं। हालांकि इसके इतिहास का लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही लोककथा के रूप में यह कहानी आज भी दंगल से जुड़ी है। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं, लेकिन महिलाओं का अखाड़े में उतरना बंद नहीं हुआ। प्रतियोगिता के समापन पर ग्राम प्रधान गिरिजा देवी ने विजेता और उपविजेता महिलाओं को नकद पुरस्कार और उपहार देकर सम्मानित किया। रेफरी की भूमिका अभिलाषा गुप्ता और पूजा गुप्ता ने निभाई। मुस्करा विकासखंड के लोदीपुर निवादा गांव में आयोजित होने वाले इस दंगल में अखाड़े और उसके आसपास किसी पुरुष को आने की अनुमति नहीं होती। गांव के पुरुष या तो अपने घरों में रहे या प्रतियोगिता के दौरान गांव से बाहर चले जाते हैं। दंगल देखने से लेकर मुकाबलों में हिस्सा लेने तक की जिम्मेदारी महिलाएं ही संभालती हैं। कजली पर्व पर ही क्यों होता है दंगल? बुंदेलखंड में कजली पर्व का लोकजीवन और पारंपरिक उत्सवों से गहरा संबंध रहा है। रक्षाबंधन के बाद होने वाले आयोजनों में गीत-संगीत, मेलों और पारंपरिक खेलों की भी भूमिका रही है। लोदीपुर निवादा में इसी परंपरा का हिस्सा महिलाओं का यह दंगल माना जाता है। कजली पर्व पर होने वाला यह आयोजन सिर्फ कुश्ती प्रतियोगिता नहीं है। यह गांव की महिलाओं को एक साथ आने, अपनी शारीरिक क्षमता दिखाने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर भी देता है। दंगल में जीत से ज्यादा परंपरा निभाने का महत्व ग्रामीणों के अनुसा– इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि यहां कुश्ती केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है। बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह पुरानी परंपरा को जिंदा रखने का मौका है, जबकि नई पीढ़ी की युवतियों के लिए यह अपनी ताकत, आत्मविश्वास और खेल प्रतिभा दिखाने का मंच बन रहा है। घूंघट में अखाड़े में उतरने वाली महिलाएं एक तरफ बुंदेलखंड की पारंपरिक सामाजिक संस्कृति की झलक दिखाती हैं, तो दूसरी तरफ कुश्ती के जरिए नारी शक्ति का प्रदर्शन भी करती हैं। यही वजह है कि गांव में हर साल होने वाला यह दंगल अब स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। बुंदेलखंड की लोकपरंपरा और नारी शक्ति का संगम समय के साथ कुश्ती के इस आयोजन का स्वरूप भले ही बदल गया हो, लेकिन इसकी मूल भावना अब भी कायम है। महिलाओं का अखाड़े में उतरना, बुजुर्गों का ढोल-थाप से उत्साह बढ़ाना और पुरुषों का आयोजन से दूर रहना इस दंगल को सामान्य कुश्ती प्रतियोगिताओं से अलग बनाता है। कजली पर्व पर होने वाला लोदीपुर निवादा का यह महिला दंगल बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति, सामुदायिक भागीदारी और नारी शक्ति का अनूठा संगम है। यही परंपरा इसे हर साल गांव के लोगों और आसपास की महिलाओं के लिए खास बना देती है। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अंकित बालियान को मारने करनाल से शामली गए थे शूटर्स:4 कस्टडी में, मास्टरमाइंड की तलाश में 4 राज्यों की पुलिस, 80 CCTV खंगाले हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस ने 4 संदिग्ध हमलावरों को हिरासत में लिया है। जांच के दौरान पुलिस ने करीब 80 सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। जिम के एंट्री रजिस्टर की जांच की। एसओजी टीम को सीसीटीवी से चारों शूटर्स की पहचान हुई, जो हरियाणा के करनाल से बिडौली होते हुए शामली पहुंचे थे। पूरी खबर पढ़िए…
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