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    हाईकोर्ट की डीएम-एसपी पर टिप्पणी के बाद संभल में प्रदर्शन:ग्रामीणों ने किया घर में सामूहिक नमाज का विरोध, पलायन की चेतावनी दी

    1 hour ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच ने संभल की गौसिया मस्जिद में 20 लोगों को नमाज पढ़ने से रोकने के मामले में डीएम-एसपी पर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दे दें या तबादला करा लें। इस टिप्पणी के बाद ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। रविवार शाम करीब 6 बजे संभल जनपद की चंदौसी तहसील के थाना हयातनगर क्षेत्र के धनैटा सोतीपुरा गांव के दर्जनों ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट बहजोई पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में हुए फैसले के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग जबरन सामूहिक नमाज पढ़ने पर आमादा हैं, जिससे गांव में अप्रिय घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने जाहिद पुत्र सिद्ध, हामिद पुत्र सिद्ध और मुनाजिर पुत्र जाहिद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि गांव में कोई नई परंपरा शुरू न की जाए और उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय के 25 अप्रैल 2018 के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रेमराज सिंह, महेश चंद्र, नरेंद्र कुमार, रवि कुमार, पिंकू सिंह, दीपक सिंह, विनीत कुमार, धर्मेंद्र सिंह, जसबीर सिंह, गुलवीर सिंह, मुकेश कुमार, अनुज कुमार, दिनेश, प्रदीप, संजीव सिंह, ओमपाल सिंह, भोजराज सिंह, मुनेंद्र सिंह और जसवीर सिंह सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीण मनोज चौधरी ने बताया कि कुछ लोग अवैध तरीके से घर को मस्जिद बनाकर उसमें सामूहिक नमाज पढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार समझौते हो चुके हैं, लेकिन हर बार उनका उल्लंघन किया जाता है। चौधरी ने आरोप लगाया कि कोर्ट ने एकतरफा फैसला दिया है और इसमें प्रशासन या गांव के किसी हिंदू पक्ष को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा तो वे कोर्ट जाएंगे और न्याय न मिलने पर गांव से पलायन करने को मजबूर होंगे। एक अन्य ग्रामीण सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि यह विवाद वर्ष 1994 से चला आ रहा है। उनके अनुसार, कुछ लोग किसी न किसी रूप में धर्मस्थल, जैसे मस्जिद या मदरसा बनाकर सामूहिक नमाज पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लगातार इसका विरोध करते रहे हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि हर विवाद के बाद समझौता होता है, लेकिन उसका बार-बार उल्लंघन किया जाता है और नई-नई गतिविधियां शुरू की जाती हैं।
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