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    हाईटेक तकनीक से लैश होगा नगर निगम का कंट्रोल रूम:बारिश की जानकारी सटीक मिलेगी, पहले ही जलभराव की कमी दूर कर ली जाएगी

    4 hours ago

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    गोरखपुर में हर साल मानसून के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। इसके तहत अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल को अपग्रेड किया जाएगा और शहर में मिनी मेट्रोलॉजिकल डॉप्लर रडार लगाया जाएगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नगर निगम को मौसम से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में मिलेगी। अभी तक शहर के लिए मौसम की जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग के पटना केंद्र से मिलती थी। जिसमें पूरे शहर का सामान्य डेटा दिन में केवल दो बार उपलब्ध होता था। इससे वार्ड स्तर पर सही जानकारी नहीं मिल पाती थी और समय पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता था। मिनी मेट्रोलॉजिकल डॉप्लर रडार एक छोटा और पोर्टेबल उपकरण है। जो वर्षा की तीव्रता, हवा की दिशा और गति को सटीक रूप से मापता है। यह एक्स-बैंड तकनीक पर काम करता है और छोटे-छोटे बादलों व जल कणों का भी पता लगा सकता है। इसके जरिए भारी बारिश, आंधी-तूफान या बादल फटने जैसी संभावित आपदाओं की पहले से चेतावनी मिल सकेगी। कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी जानकारी इस सिस्टम के लागू होने के बाद शहर के हर वार्ड की जानकारी सीधे नगर निगम के कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। जैसे ही किसी इलाके में जलभराव की स्थिति बनेगी, तुरंत कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। इससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी और नुकसान कम होगा। नगर निगम इस अपग्रेडेशन की कार्ययोजना जल्द ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सामने पेश करेगा। इस योजना को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए कुल 750 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिसमें पहले चरण में 222 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस योजना में सिर्फ रडार ही नहीं, बल्कि कई अन्य सुधार भी शामिल हैं। इनमें अर्ली फ्लड इंफॉर्मेशन सिस्टम की संख्या 200 से अधिक करना, ऑटोमेटिक रेन गेज बढ़ाना, नालों की क्षमता बढ़ाना और शहर के 19 पोखरों को पुनर्जीवित करना शामिल है। साथ ही आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया की मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा। इससे न सिर्फ जलभराव की समस्या का जल्दी समाधान होगा, बल्कि शहर की आपदा प्रबंधन क्षमता भी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
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