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    हापुड़ में AQI 300 के पार पहुंचा, ग्रेप वन लागू:मौसम बदलने से प्रदूषण बढ़ा; सांस के मरीजों को खतरा

    1 hour ago

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    हापुड़। मौसम बदलने के साथ ही हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। हापुड़ में 20 अक्टूबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 188 था, जो मंगलवार रात करीब एक बजे CPCB के आंकड़ों के मुताबिक 311 के पार पहुंच गया। जबकि बुधवार सुबह 7 बजे 331 हो गया। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करने पर जोर जिले में ग्रेप का पहला चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत कूड़ा जलाने और खुले में निर्माण सामग्री रखने पर रोक लगाने जैसे निर्देश हैं। पिछले 2 दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर 188 से बढ़कर 300 पार पहुंच गया है। वर्तमान में हवा का स्तर बहुत खराब श्रेणी में दर्ज है। बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी और कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। ADM संदीप कुमार ने बताया कि प्रदूषण को कम करने के लिए प्रमुख सड़कों पर नियमित रूप से मशीनों के जरिये सफाई और पानी का छिड़काव कराने, खुले में किसी भी प्रकार का कचरा या सूखा मलबा जलाने पर पूरी तरह रोक, नगर पालिकाओं को ठोस कचरे और निर्माण अपशिष्ट का समय पर उठाव करने, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के तमाम नियमों का पालन करने और साइटों पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। सांस रोगियों के लिए सतर्कता जरूरी CPCB के मानकों के मुताबिक, 201 से 300 तक का AQI खराब और 301 से 400 बहुत खराब श्रेणी में आता है। 301 से ऊपर AQI होने पर सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अस्थमा, हृदय रोगी, बच्चे और बुजुर्गों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। सांस रोग विशेषज्ञ डॉ पराग शर्मा के मुताबिक प्रदूषण बढ़ने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को बाहर की गतिविधियां सीमित रखनी चाहिए। खांसी, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
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