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    हरे चारे में साइनाइड का खतरा, पशुपालन विभाग सतर्क:हरदोई में बढ़ते तापमान में किसानों को सावधानी बरतने की सलाह

    1 hour ago

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    हरदोई। जिले में बढ़ते तापमान के कारण पशुओं के हरे चारे में जहरीले तत्व विकसित होने का खतरा बढ़ गया है। पशुपालन विभाग ने किसानों और पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मार्च और अप्रैल में बोई गई चरी में साइनाइड जैसे विषैले तत्व बनने की आशंका जताई गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि तेज धूप और सिंचाई के अभाव में खेतों में खड़ी चरी तथा अन्य हरे चारे की पत्तियों में विषैले तत्व पनपने लगते हैं। विशेष रूप से ज्वार और चरी की फसल में प्रूसिक एसिड और साइनाइड जैसे जहरीले तत्व बनने की संभावना रहती है। यह चारा मवेशियों को खिलाने पर उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है और कई मामलों में पशु की जान भी जा सकती है। डॉ. सिंह के अनुसार, छोटी अवस्था की ज्वार की फसल मवेशियों को नहीं खिलानी चाहिए। चरी को काटने से पहले खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करना आवश्यक है। नियमित सिंचाई करने से फसल में पनपने वाला विषैलापन कम हो जाता है और जमीन के माध्यम से नीचे उतर जाता है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में समय-समय पर पानी लगाते रहें और सूखी हालत में चारा न कटवाएं। पशु चिकित्सकों ने बताया कि यदि किसी मवेशी में जहरीला चारा खाने के बाद हांफना, बेचैनी, बुखार, लार गिरना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। प्राथमिक उपचार के तौर पर 100 ग्राम हाइपो पानी में घोलकर देने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह अनिवार्य है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे भीषण गर्मी में पशुओं को साफ पानी, छांव और सुरक्षित चारा उपलब्ध कराएं। थोड़ी सी सावधानी पशुधन को बड़े नुकसान से बचा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सलाह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां पशुपालन आय का प्रमुख साधन है।
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