Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    हरियाणा के 'सिक्स पैक वाले ताऊ':रोज 25 किलोमीटर रेस, 800 सपाटे लगा रहे; बोले- देसी घी नहीं मिला तो सरसों का तेल पिया

    2 hours ago

    1

    0

    हरियाणा के सोनीपत में 'सिक्स पैक वाले ताऊ' की खूब चर्चा हो रही है। वह देसी अंदाज में कसरत करते हैं। वे रोज 25 किलोमीटर की रेस और 800 सपाटे लगाते हैं। भरे हुए एलपीजी सिलेंडर और पुराने पत्थर की ओखली को उठाकर आसानी से एक्सरसाइज करते हैं। यहां तक कि पानी से भरी बाल्टियों को भारी-भरकम मूसल में टांगकर भी एक्सरसाइज करते हुए नजर आते हैं। सोनीपत के जठेड़ी गांव के रहने वाले संजय उर्फ काला पहलवान की उम्र करीब 51 साल है। काला पहलवान ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत में बताया कि वे बचपन में पहलवान बनना चाहते थे। 1991 में एक साल अपने गुरु रघुबीर सिंह रायपुरिया के अखाड़े में भी गए थे, लेकिन घर के हालात के कारण अखाड़ा छूट गया। कई बार घर में देसी घी तक नहीं होता था। ऐसे में घी की जगह सरसों का तेल पीकर अखाड़े में प्रैक्टिस की। इस अधूरे सपने का मलाल आज भी उनके दिल में है। दिल्ली में होने वाली मैराथन में शामिल होंगे संजय पहलवान ने बताया कि साल 2006 में उनकी शादी हो गई थी। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। बेटियां पढ़ाई कर रही हैं, जबकि बेटा पहलवानी कर रहा है। उनके पिता प्रताप का 2010 में निधन हो गया था और उनकी मां आज भी उनके साथ रहती हैं। फिर सालों बाद उन्होंने सोचा कि जो बचपन या जवानी में नहीं कर सके, अब वो शौक पूरा क्यों न करें। बस इसलिए पहले घर में ही कसरत करते थे, अब युवाओं के साथ स्टेडियम में जाकर प्रैक्टिस करते हैं। अब दिल्ली में होने वाली मैराथन में 42 किलोमीटर वर्ग में एंट्री भरी है। घर में जुगाड़ जिम के साथ डाइट भी एकदम देसी है। वे रोज़ मुनक्का और मौसमी का जूस पीते हैं। अब जानिए सिक्स पैक वाले ताऊ की पूरी कहानी…. बचपन में एक साल पहलवानी की: संजय पहलवान बताते हैं कि बचपन में पहलवानी का शौक था। घरवालों से जिद करके अखाड़े में जाना शुरू किया। हमारे गुरू होते थे- रघुबीर सिंह रायपुरिया। घर के हालात ऐसे नहीं थे कि पहलवानों वाली डाइट मिले, लेकिन जुनून ऐसा था कि जो रुखी-सूखी मिलती थी, उसी में खुश रहे। फिर भी हालात की वजह से अखाड़ा छोड़ना पड़ गया। अखाड़ा छूटा लेकिन अभ्यास जारी रखा: उन्होंने बताया कि घर के हालात के कारण अखाड़ा जाना तो छूट गया लेकिन वह अभ्यास करते रहे। पहलवान तो अक्सर दूध-देसी घी पीते-खाते हैं। हमारे हालात ऐसे थे कि देसी घी नहीं मिलता था। मैं तो सरसों का तेल ही पी लेता था, उसी से मेरी खुराक पूरी हो जाती थी। अब काला पहलवान की दिनचर्या और डाइट जानिए…. रोज तड़के 3 बजे उठते हैं: वे बताते हैं कि वे रोज तड़के 3 बजे उठ जाते हैं। उठते ही सबसे पहले रात में भिगोई गई 20-25 मुनक्कों का रस पीते हैं। उसके बाद कुछ सैर करके फ्रेश हो जाते हैं। फिर अपनी सफेद पगड़ी, सफेद धोती और सफेद जूते पहनकर गाड़ी से स्टेडियम पहुंच जाते हैं। 20 से 25 किलोमीटर दौड़ और फिर सपाटे: स्टेडियम में जाकर 20 से 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। ये एक तरह से उनके लिए वार्मअप करने जैसा ही है। इस दौरान वे युवाओं के साथ फर्राटा दौड़ भी लगाते हैं। उनकी ऐसी कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें महिला एथलीट तालियां व सीटियां बजाकर उनका हौसला बढ़ा रही हैं। वे चिल्लाकर कह रही हैं- ओ गया ताऊ! ट्रैक पर निकालते हैं मौसमी का जूस: रेस लगाने के तुरंत बाद वह ट्रैक पर ही हाथ से चलने वाले जूसर में मौसमी का जूस निकालकर पीते हैं। वे कहते हैं कि ये जूस उनके लिए सबसे जरूरी खुराक है। इससे वे ताजादम महसूस करते हैं। वे युवाओं को भी सही सलाह देते हैं कि दूध से भी ज्यादा जरूरी जूस है। रोज 700-800 सपाटे लगाते हैं काला पहलवान रोज स्टेडियम के ट्रैक पर ही ईंटें रखकर 700-800 सपाटे मारते हैं। अक्सर युवा एथलीट उन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं और कई बार उनके सपाटे गिनते भी हैं। युवा एथलीट उनसे अपना कुर्ता उतारकर मसल्स दिखाने का आग्रह भी करते हैं। वे दावा करते हैं कि यदि रनिंग छोड़ दें तो 2000 सपाटे तक लगा सकते हैं, और पहले भी कई बार 800 सपाटे रनिंग के बाद लगा चुके हैं। बीम एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग के साथ उनकी रोजाना 4 घंटे की कड़ी प्रैक्टिस होती है। रोज बादाम रगड़ कर पीते हैं उन्होंने बताया कि घर में एक्सरसाइज के बाद रोज घर पर भिगोए गए 65-70 बादाम को कुंडी में रगड़ा लगाते हैं, फिर उसका जूस पीते हैं। दूध मिल गया तो पी लेते हैं, वैसे जरूरी नहीं। इसके अलावा खाने में रोटी-दाल-सब्जी या चटनी जो मिल जाए वो खा लेते हैं और कोई विशेष डाइट नहीं लेते। आजकल के युवा जो प्रोटीन शेक जैसे सप्लीमेंट लेते हैं, उनकी कोई जरूरत नहीं। बीमारी के सवाल पर वह हंसते हैं और कहते हैं कि भगवान की दया से कभी ऐसी नौबत नहीं आई। उन्होंने तो अपना ब्लड ग्रुप तक नहीं पता, कभी जरूरत ही नहीं पड़ी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    मथुरा में हाईवे पर बाइक सवार लुटेरों का आतंक:10 दिन में 4 महिलाओं के छीने कुंडल, पुलिस ने मुठभेड़ के बाद एक आरोपी को किया गिरफ्तार
    Next Article
    MP में आज से खिलेगी धूप:राजस्थान में तापमान 30° पार; हरियाणा की रातें सर्द, उत्तराखंड में 22 फरवरी से बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment