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    IAS बनने से लेकर हुनर को पहचान बनाने तक:जानिए गोरखपुर की महिलाओं की कहानी, जिन्होंने कुछ अलग करने की ठानी

    3 hours ago

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    कोई हाल ही में IAS बनी तो किसी ने अपने हुनर से खुद का बिजनेस खड़ा किया। इंटरनेशनल वुमेंस डे पर जानते हैं गोरखपुर की उन वुमेंस की स्क्सेज स्टोरी, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक अलग पहचान बनाई। एक तरफ राप्तीनगर की रहने वाली इशिता शर्मा, हाल ही UPSC का एग्जाम क्लीयर करके IAS बनी। अब वो एक जिले का कमान संभालेंगी। तो दूसरी ओर अंकिता त्रिपाठी ने भी अपनी हुनर और बचपन के शौक के दम पर एक बिजनेस खड़ा किया है। 2017 में पेपर क्राफ्ट से शुरू किया गया यह स्माॅल बिजनेस आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अंकिता का पहचान बना हुआ है। अब वह एंब्रॉयडरी का काम करती हैं। इनके बनाए गए हूप्स को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। वहीं एक बेहद ही समान्य परिवार से आने वाली रीमा ने स्कूल टाइम में ही बड़े सपने देखें। डिजाइनर ड्रेस बनाने के हुनर को संवारा। एक मशीन से बिजनेस शुरू की और आज 2 दुकानों की ओनर हैं। कई बेरोजगार महिलाओं को रोजगार देती हैं। एक दिन इंडिया की सबसे बड़ी डिजाइनर में से एक बनना चाहती है। इनका कहना है कि हर महिला को फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट बनना चाहिए। ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें। पहले 12th में किया टॉप फिर बनी IAS गोरखपुर की रहने वाली इशिता शर्मा ने चौथे अटेम्प्ट में UPSC का एग्जाम न सिर्फ क्लियर किया है बल्कि ऑल इंडिया IAS रैंक में, 26 वां स्थान हासिल किया है। इशिता बताती हैं कि जब से मैंने होश संभाला तबसे ही मेरा ड्रीम आईएस बनने का था। उसी को लक्ष्य लेकर मैं पढ़ाई करती थी। जब मैंने 12 वीं में टॉप किया तब मुझसे पूछा गया कि क्या बनना चाहती हो। मैंने कहा था IAS बनूंगी। तबसे मैं और मेहनत इसके लिए करने लगी। पहले और दूसरे अटेम्प्ट मेरा प्री भी क्वालीफाई नहीं हुआ। उस समय मुझे लगा शायद मेरे बस का नहीं है। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। फैमिली से मोटिवेशन मिला और मैंने तीसरा अटेम्प्ट दिया। उस समय मैं इंटरव्यू तक गई। लेकिन 14 नंबरों से सिलेक्शन नहीं हुआ। थोड़ा बुरा जरुर लगा। फिर मैंने कमियों पर ध्यान दिया और उम्मीद बनाए रखा। चौथे अटेम्प्ट के बाद मेरा क्लीयर हुआ है। इशिता कहती हैं कि सभी लड़कियों को सेल्फइंडीपीडेंट बनने पर हमेशा जोर लगाना चाहिए। जो भी हुनर आपके अंदर है उसी से आगे बढों। जब हम फाइनेंशियल इंडिपेंडेंट रहेंगे तभी अपने फैसले खुद ले सकेंगे। जानिए इशिता के बारे में इशिता ने अपनी स्कूलिंग सरस्वती बालिका विद्यालय से की। उसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.काम और एम.काम किया। लेकिन यूपीएससी की तैयारी गोरखपुर से ही की। उन्होंने सेल्फ स्टडी पर सबसे ज्यादा फोकस किया और कुछ ऑनलाइन क्लासेज की मदद ली। इशिता ने पढ़ाई में कंसिस्टेंसी रखी और क्वालिटी लर्निंग पर फोकस किया। घंटा देखकर पढ़ने के बजाय टॉपिक को गहराई से समझने का प्रयास किया। इशिता के पिता डीके शर्मा एक बैंक मैनेजर हैं और मां अर्चना हाउस वाइफ। बेटी की ड्रीम को अपना ड्रीम बनाकर उन्होंने इशिता को सपोर्ट किया। रिजल्ट आने के बाद खुशी का ठिकाना नहीं है। बचपन के शौक को बनाई पहचान, स्कॉटलैंड, दुबई से मिलते ऑर्डर गोरखपुर में राप्तीनगर की रहने वाली अंकिता त्रिपाठी की ने भी अपनी मेहनत के दम पर एक अलग पहचान बनाई। आज विदेशों से उन्हें ऑर्डर मिलते हैं। अंकिता बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही क्राफ्ट बनाने का शौक था।लेकिन कभी सोचा नहीं था कि एक दिन इसे ही बिजनेस बनाएंगी। पहले उन्होंने एसआई बनने का सपना देखा। लेकिन कुछ समय तक तैयारी करने के बाद जब रिजल्ट पॉजिटिव नहीं मिला तो तब उन्होंने अपने शौक और टैलेंट को पहचान बनाना चाहा। 2017 में उन्होंने घर से ही पेपर क्राफ्ट का छोटा सा बिजनेस स्टार्ट किया। कुछ ऑर्डर मिलने भी लगे। लेकिन घर वाले चाहते थे कि पढ़ाई करके कुछ बने। इसलिए अंकिता को घर से सपोर्ट नहीं मिला। परिवार ने लगातार विरोध किया। थक हार कर उन्होंने इस काम को बंद कर दिया। फिर बीएड की। साथ में कुछ और गवर्नमेंट जॉब की तैयारी की। लेकिन उनका मन अब पढ़ाई से ज्यादा अपने हुनर को संवारने में लगता था। पिता के मौत ने तोड़ा साल 2018 में उनके पिता की मौत हो गई। जिसके बाद वह पूरी तरह टूट गई। कुछ समझ नहीं आता था कि क्या करें। अंकिता अपनी फैमिली को फाइनेंशियली सपोर्ट करना चाहती थी। जॉब का कोई ठिकाना नहीं था। फिर उन्होंने अपना बिजनेस शुरू करने का मन बनाया। उस समय भी परिवार में किसी ने मदद नहीं की। फिर भी अंकिता हिम्मत बनाई रखी। उन्होंने अब एंब्रॉयडरी का काम शुरू किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगी। गोरखपुर में Hoops का नया ट्रेंड लोगों ने उनके काम को काफी ज्यादा पसंद किया और ऑनलाइन आर्डर मिलने शुरू हो गए। अंकिता ने बताया कि हूप्स का पहला ऑर्डर तैयार करके मैंने पोस्ट किया। तबसे धीरे-धीरे मुझे आर्डर मिलने लगे। आज इंडिया के अंदर पंजाब, राजस्थान, केरल, जम्मू-कश्मीर और लगभग हर जगह से हूप्स के सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलते हैं। इसके अलावा स्कॉटलैंड, दुबई और चाइना से भी ऑर्डर मिले। जिन्हें इंडिया में ही डिलीवर करना था। सोशल मीडिया से मिली मदद लोग इंस्टाग्राम पर देखकर मुझे ऑर्डर देते हैं और मैं इसे कम्प्लीट करने के बाद स्पीड पोस्ट से उनके एड्रेस पर डिलीवर कर देती। मुझे खुशी है कि इस काम में मेरी फैमिली अब सपोर्ट करती है। मैंने ये कला सीखने के लिए कोई ट्रेनिंग या क्लास नहीं लिया है। बस मेरी दिमाग की क्रिएटिविटी है और बचपन का शौक। उम्र छोटी, हौसले बुलंद, नैंसी त्यागी से होती इंस्पायर गोरखपुर के जंगल धूसड़ की रहने वाली एक समान्य सी लड़की रीमा के सपने बड़े हैं। अपने मेहनत के दम पर एक दिन बहुत बड़ी डिजाइनर बनना चाहती हैं। जिसकी राह पर स्कूल के दिनों में ही चलना शुरू कर दी थी। 24 साल की रीमा को परिवार वालों ने 12वीं के बाद ही शादी का दबाव बनाया। मना करने पर पिता आज तक बात नहीं करते। रीमा को शादी करके किसी और की पहचान से अपनी जिंदगी नहीं बितानी थी। बल्कि मेहनत करके समाज में अलग पहचान बनाना था। जिसके लिए सबसे पहले घर वालों से लड़ना पड़ा। उसे पढ़ाई के अलावा किसी काम के लिए बाहर जाने का परमिशन नहीं था। वो थोड़ा बहुत कपड़े की डिजाइनिंग और सिलाई जानती थी। इसे और अच्छे से सीख कर इसी में अपना करियर बनाना चाहती थी। लेकिन घर वालों का कहना था कि 12वीं तक पढों उसके बाद बिदा हो जाओ। रीमा ने हार नहीं मानी। अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। दोस्त की मदद से एक फाउंडेशन से जुड़ी। जहां तनु ने उन्हें सिलाई और अच्छे से सिखाया। उसके बाद घर पर कुछ लड़कियों को ट्रेनिंग देकर और गांव की सिलाई करके कुछ पैसे जोड़ रखे थे। फिर अपने सपनों का दुकान खोली। बनना चाहती बेस्ट डिजाइनर रीमा का कहना है कि जिस दिन दुकान की ओपनिंग थी, उस दिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। सिर्फ एक मशीन के साथ अपना बिजनेस स्टार्ट किया था। दो साल के अंदर मेरे पास 5 से 6 मशीन है। मैंने कई महिलाओं को रोजगार भी दिया है। लगभग 15 लड़कियों को ट्रेनिंग भी देती। जल्द ही दूसरा बुटिक खोलने की तैयारी में हूं। मुझे एक दिन नैन्सी त्यागी की तरह इंडिया की बेस्ट डिजाइनर में से एक बनना है। जब वो कर सकती है तो मैं भी कर सकती हूं।
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