Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    IG अजय मिश्रा को हाईकोर्ट की फटकार:कहा- पुलिस की लचर व्यवस्था का फायदा आरोपियों को मिला, निर्दोष महिला 80 दिन जेल में रही

    16 hours ago

    2

    0

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के पूर्व पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने एक जमीन विवाद के मामले में गैंगस्टर एक्ट लगाने की पूरी कार्रवाई को गलत मानते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस की लापरवाही और बिना जांच के एक्शन लिया गया। इसका फायदा आरोपियों को मिला। कोर्ट ने कहा कि एक सामान्य जमीन विवाद को गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर मामले की तरह दिखाया गया। पुलिस की लचर व्यवस्था के चलते महिला को करीब 80 दिन जेल में रहना पड़ा, जबकि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे। अदालत ने माना कि इस तरह की कार्रवाई से लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने केवल इस मामले पर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि कानून का इस्तेमाल सोच-समझकर और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए, न कि जल्दबाजी या दबाव में। अब जानिए पूरा मामला…. जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला पूरा मामला गाजियाबाद के एक जमीन विवाद से जुड़ा है। राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ पहले धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोपों में केस दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई भी शुरू कर दी। मामले में परिवार की सदस्य ललिता त्यागी को भी आरोपी बनाया गया। अदालत के अनुसार, उनके खिलाफ ऐसा कोई मजबूत आधार रिकॉर्ड में नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि वह किसी संगठित गिरोह का हिस्सा थी। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल में वह करीब 80 दिन तक रहीं। गैंगस्टर एक्ट लगाने पर उठे सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर गंभीर कानून लगाने से पहले उसके समर्थन में पर्याप्त सबूत होने चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर किसी को गैंगस्टर नहीं माना जा सकता। अदालत को रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि आरोपी संगठित गिरोह चलाते थे या लोगों को डराकर आर्थिक लाभ हासिल कर रहे थे। अदालत ने कहा कि उस समय गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर रहे अजय मिश्रा ने गैंग चार्ट को मंजूरी देते समय पर्याप्त सावधानी नहीं बरती। कोर्ट का कहना था कि इस तरह के मामलों में अधिकारियों को सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी जिक्र फैसले में अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पहले से तय कानूनी प्रक्रिया और उच्च अदालतों के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। बिना पूरी जांच और पर्याप्त आधार के किसी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि कई बार अधिकारियों के तबादले, नियुक्तियां और फैसले योग्यता के बजाय अन्य कारणों से प्रभावित होते दिखाई देते हैं। इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में गिरफ्तारी, मुकदमे और अन्य कार्रवाई पूरी सावधानी के साथ नहीं की जाती। न्यायालय का मानना है कि कानून का उद्देश्य लोगों को न्याय देना है, इसलिए हर कार्रवाई तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए। कोर्ट ने क्या फैसला दिया हाईकोर्ट ने राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई पूरी कार्रवाई रद्द कर दी। साथ ही तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा को भविष्य में अधिक सावधानी, संतुलन और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी संविधान और कानून के अनुसार काम करना है। किसी भी अधिकारी को अपने पद का इस्तेमाल पूरी निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए, ताकि आम लोगों का भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    राजनाथ सिंह से मिले प्रतिनिधिमंडल, विकास मुद्दों पर चर्चा:शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्यमियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने रखे सुझाव
    Next Article
    संभल का मिलक मिथोली 15 दिन से अंधेरे में:ट्रांसफॉर्मर न बदलने पर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, 50 केवीए ट्रांसफार्मर की मांग

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment