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    IIT कानपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के बीच करार:वैश्विक जनस्वास्थ्य और मेडटेक में मिलकर करेंगे काम

    4 hours ago

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    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर अब कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के साथ मिलकर वैश्विक जनस्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी (MedTech) के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। शुक्रवार को आईआईटी कानपुर परिसर में दोनों संस्थानों के बीच एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य डीप-टेक, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है। कनाडा से आए इस प्रतिनिधिमंडल में यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. माइकल बेनारोच, स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के डीन डॉ. पीटर निकर्सन और इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के कार्यकारी निदेशक डॉ. जेम्स ब्लैंचर्ड सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें संस्थान की आगामी परियोजनाओं जैसे 'गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज' और 'कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। निदेशक ने मेडटेक क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को भी रेखांकित किया। इन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मेडटेक और मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों का विकास करेंगे। साथ ही डिजिटल तकनीक, AI और डेटा साइंस के माध्यम से बीमारियों की सटीक पहचान और समाधान पर काम किया जाएगा। यह समझौता फैकल्टी और छात्रों के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम, संयुक्त शोध प्रकाशन और साझा शैक्षणिक कार्यक्रमों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से नए स्वास्थ्य स्टार्टअप्स को भी इसके तहत बढ़ावा दिया जाएगा। तकनीक से सुधरेगा जनस्वास्थ्य बैठक में पूर्व आईएएस अधिकारियों डॉ. वसंतकुमार नमासिवायम और श्री विकास गोठलवाल ने भी अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनस्वास्थ्य की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए तकनीकी दृष्टिकोण अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों की अधिष्ठाता प्रो. बुशरा अतीक ने कहा कि यह समझौता संस्थान की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करेगा। यह साझेदारी बहु-विषयक विशेषज्ञता के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में मदद करेगी।
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