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    ईंट-भट्टों के सर्वे पर हाईकोर्ट सख्त:रिपोर्ट न देने पर नगर निगम के अधिकारी तलब

    5 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शहर की बाहरी सीमा से पाँच किलोमीटर के अंदर बने ईंट-भट्टों के सर्वे रिपोर्ट में देरी पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने नगर निगम और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया है। पिछली सुनवाई में न्यायालय ने इस विषय पर सर्वे करके रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, नगर निगम ने सफाई दी कि सर्वे के लिए टीम का गठन तो किया गया था, लेकिन कुछ कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका। इस पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दोनों विभागों के राजपत्रित अधिकारियों को तलब किया है। अगली सुनवाई 3 अप्रैल तय की गई है, जिसमें सर्वे न होने पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने दुर्गेश कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने याद दिलाया कि 14 जनवरी को ही नगर निगम को निर्देश दिया गया था कि वह अपने अधिकारियों को नामित कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर पांच किलोमीटर दायरे में आने वाले सभी ईंट-भट्टों का सर्वे करे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि सर्वे के बाद शपथपत्र दाखिल कर भट्टों की स्थापना तिथि, अनुमति की स्थिति और संबंधित प्राधिकरणों से मिली स्वीकृतियों का पूरा ब्योरा पेश किया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश ईंट-भट्टा (स्थापना हेतु स्थान निर्धारण मापदंड) नियमावली, 2012 के तहत नगर निगम सीमा से पांच किलोमीटर के भीतर ईंट-भट्टों की स्थापना प्रतिबंधित है। यह नियम 27 जून 2012 से लागू है। नियमानुसार, भट्टों के संचालन की अनुमति केवल पांच वर्ष के लिए होती है और 2012 के बाद उनके नवीनीकरण पर विचार किया जाना आवश्यक है।
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