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    इमरान मसूद से खड़गे बोले-उसको UP में घुसने मत दो:हैदराबाद वाला आया तो हमें खत्म करके जाएगा; क्या ओवैसी की तरफ इशारा है?

    5 hours ago

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    यूपी में ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पंचायत और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बूथों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। इससे कांग्रेस परेशान हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे असदुद्दीन ओवैसी को हर कीमत पर रोकना चाहते हैं। खड़गे का एक वीडियो सामने आया है, जो संसद कैंपस का है। खड़गे ने कहा, ‘उसको आने मत दो। वो एक बार आएगा। वो तो खत्म हो जाएगा, क्योंकि वो नेशनल पार्टी नहीं है। लेकिन हमको खत्म करके जाएगा। कौन...हैदराबाद वाला।’ खड़गे के साथ सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खड़े थे। 'हैदराबाद वाला' कमेंट को ओवैसी से जोड़कर देखा जा रहा है। AIMIM ने यूपी के पंचायत चुनावों को अपना ‘लिटमस टेस्ट’ बनाने का फैसला किया है। गांव-गांव सदस्यता अभियान, बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट और ग्राम पंचायत स्तर पर 121 सदस्यीय समितियों का गठन किया गया है। असदुद्दीन के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी भी दावा कर चुके हैं कि वे यूपी आ रहे हैं। ओवैसी बंधुओं की इस सक्रियता ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वीडियो में क्या कहते दिखे खरगे? वीडियो में मल्लिकार्जुन खड़गे हैं। वे इमरान मसूद से कहते हैं- उसको यूपी में मत घुसने दो। वो एक बार आएगा, वो तो खत्म हो जाएगा, क्योंकि वो नेशनल पार्टी नहीं है। लेकिन हमको खत्म करके जाएगा। कौन...हैदराबाद वाला। तुम जानते हो, हैदराबाद तीन चीजों के लिए मशहूर है—एक शेरवानी, दूसरी बिरयानी और तीसरी परेशानी। हालांकि खड़गे ने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स इस बयान को हैदराबाद के रहने वाले असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM से जोड़कर देख रहे हैं। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… 2 पोस्ट देखिए… तेलंगाना में दोस्ती, यूपी में दूरी? दिलचस्प यह है कि तेलंगाना में कांग्रेस अक्सर AIMIM को ‘फ्रेंडली पार्टी’ कहती रही है। जुबिली हिल्स उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने AIMIM के साथ तालमेल का खुलकर बचाव भी किया था। ओवैसी लड़े तो किससे सबसे ज्यादा नुकसान होगा? 2024 लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने महागठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को मुस्लिम वोटों का भारी समर्थन मिला, जिससे पार्टी ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी सफलता हासिल की। 2027 विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां इसी बैनर तले उतरने की तैयारी में हैं। लेकिन मुस्लिम वोट बैंक पर खतरा मंडरा रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने हाल के महाराष्ट्र निकाय चुनावों में 125 से ज्यादा सीटें जीतीं, जिसमें मुंबई के गोवंडी-मानखुर्द जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में सपा के पारंपरिक गढ़ को छीन लिया। सपा महज 2 सीटों पर सिमट गई। यह नतीजे सपा के लिए चिंता का विषय हैं। महाराष्ट्र में AIMIM ने सपा के वोटबैंक में सेंध लगाई, जहां अबू आसिम आजमी जैसे नेता लंबे समय से मजबूत थे। ओवैसी ने खुलकर अखिलेश यादव को निशाना बनाया था और कहा था कि मुस्लिम नेतृत्व आगे आएगा तो अखिलेश की 'दुकान बंद' हो जाएगी। 2017 में मुस्लिम वोटरों के बंटवारे से सपा को हुआ था नुकसान प्रदेश में भाजपा 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सत्ता में लौटी थी। तब मुस्लिमों के बंटवारे को ही बड़ी वजह बताया गया था। तब मुस्लिम बसपा–सपा के बीच बंटे थे। इसका नतीजा ये रहा था कि भाजपा ने मुस्लिम बहुल 82 में से 62 ऐसी सीटें जीत ली थी, जहां मुस्लिम वोटरों की आबादी एक तिहाई है। आंकड़े गवाह हैं कि तब करीब 2 दर्जन सीटों पर मुस्लिम वोटों के विभाजन से बीजेपी को फायदा पहुंचा था। इसमें मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बरेली, बिजनौर, मेरठ की सरधना, गोरखपुर की खलीलाबाद, अंबेडकर नगर की टांडा, श्रावस्ती जिले की श्रावस्ती और गैंसड़ी और मुरादाबाद सीट शामिल थीं। 1.25 लाख मुस्लिम आबादी वाले देवबंद में भी भाजपा जीत गई थी। मुस्लिम समुदाय सपा के माविया अली और बसपा के माजिद अली के बीच बंट गया था। फैजाबाद की रुदौली सीट से बीजेपी के रामचंद्र यादव ने सपा के अब्बास अली जैदी को 30 हजार वोटों से मात दी थी। इसी तरह शामली की थाना भवन सीट, लखनऊ (पूर्व), लखनऊ (सेंट्रल), अलीगढ़, सिवलखास, नानपुरा, शाहाबाद, बहेड़ी, फिरोजाबाद, चांदपुर और कुंदरकी की सीट भी रही। ------------- यह खबर भी पढ़िए:- नसीमुद्दीन की एंट्री से सपा क्या साधना चाहती है:ओवैसी– मायावती गठजोड़ का डर या परसेप्शन की जंग यूपी में सपा–कांग्रेस ने मिलकर 2024 लोकसभा का चुनाव लड़ा था। 2027 विधानसभा भी दोनों महागठबंधन के बैनर तले लड़ने की तैयारी में हैं। लेकिन चर्चा में कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थामने जा रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी हैं। आखिर कांग्रेस के एक बड़े नेता को सपा क्यों पार्टी में शामिल कराने जा रही है। क्या सपा को 2027 में मुस्लिम वोट बैंक खिसकने का अंदेशा है या वह ओवैसी–मायावती के संभावित गठजोड़ की काट ढूंढने में जुटे हैं। पढ़िए ये खास खबर…
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