Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Indian Air Force के आधिकारिक गीत का इतिहास, अंग्रेजी में लिखकर हुआ था हिंदी अनुवाद

    1 day ago

    1

    0

    नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के प्रेरणादायक गीत के शब्द और धुन वायु योद्धाओं के दिलों में गहराई से बसे हुए हैं। हालांकि, बल के साथ इस गीत का जुड़ाव लगभग 34 वर्ष पहले 1992 में वायु सेना की हीरक जयंती पर हुआ था। इस गीत के मूल बोल तत्कालीन ग्रुप कैप्टन जी. जे. शॉ की पत्नी जोरा शॉ द्वारा अंग्रेजी में लिखे गए थे, जिनका बाद में इसके प्रसिद्ध हिंदी संस्करण में अनुवाद किया गया।‘देश पुकारे जब सबको, दुख-सुख बांटे एक समान; नीली वर्दी वालों का दल, बढ़ता आगे सीना तान’ - ये इस समर्पित गीत की शुरुआती पंक्तियां हैं, जिसे भारतीय वायु सेना या उससे जुड़े निकायों द्वारा आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता है। बृहस्पतिवार को वायु सेना ने हिंडन वायु सेना अड्डे पर एक भव्य परेड के साथ अपनी 94वीं वर्षगांठ मनाई, जिसका नेतृत्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने किया। इससे एक दिन पहले, सात अक्टूबर को वायु सेना प्रमुख ने यहां सुब्रतो पार्क में ‘एयर फोर्स एसोसिएशन’ (एएफए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपना संबोधन दिया था।कार्यक्रम में मौजूद वायु सेना प्रमुख, सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने मिलकर यह वायु सेना गीत गाया। इस दौरान सामने स्क्रीन पर वीडियो चल रहा था और नीचे की तरफ गीत के बोल भी लिखकर आ रहे थे। एएफए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एयर मार्शल जगजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने वायु सेना प्रमुख के संबोधन से पहले इस गीत का संक्षिप्त इतिहास साझा किया।उन्होंने बताया कि आजादी के बाद वायु सेना का अपना कोई गीत नहीं था और बल के 60 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 1992 में इसे शामिल किया गया था। इस गीत की परिकल्पना एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एन. सी. सूरी के कार्यकाल के दौरान की गई थी, जिन्होंने 1991 से 1993 तक वायु सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं दी थीं। एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) सिंह ने बताया कि उनके मार्गदर्शन में हीरक जयंती समारोह के लिए एक समिति का गठन किया गया था।एयर मार्शल के. डी. लुईस इस समारोह के आयोजन से जुड़े थे और उन्हीं की एक पहल बल के लिए एक समर्पित गीत तैयार करने की थी। उन्होंने कहा, ‘तत्कालीन ग्रुप कैप्टन जी. जे. शॉ की पत्नी ज़ोरा शॉ ने अंग्रेजी में यह गीत लिखा था।’ एएफए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाद में शिक्षा निदेशालय के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा इसका हिंदी में अनुवाद किया गया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    CM Vishnu Deo Sai ने रायपुर में 1100 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र
    Next Article
    Haryana में INDIA Bloc का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment