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    ISRO चेयरमैन बोले- स्पेस एजेंसी सरकारी संस्था ही है:प्राइवेटाइजेशन नहीं हुआ, 9 कर्मचारियों संगठनों ने लेटर लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था

    23 hours ago

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    ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी सरकारी संस्था है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है। उन्होंने ISRO के कर्मचारियों की चिंताओं को जायज बताते हुए कहा कि उनका समाधान किया जाएगा। नारायणन बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX) के 9वें सीजन के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में अंतरिक्ष क्षेत्र और स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए ISRO प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ काम कर रहा है। नारायणन का बयान ISRO की 9 कर्मचारी संगठनों के 4 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद आया। संगठनों ने ISRO के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल कामों को प्राइवेट संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर जवाब मांगा था। ISRO चीफ की 3 बड़ी बातें; कहा- हर साल 50 लॉन्च व्हीकल का लक्ष्य 1. देश में स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाना जरूरी: हम सरकारी निवेश के साथ काम कर रहे हैं। लेकिन अब हमारे सामने कई तरह के काम हैं। देश में स्पेस इकोसिस्टम और स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाना जरूरी है। 2. 6 साल पहले लागू हुए स्पेस सेक्टर के सुधार: करीब 6 साल पहले स्पेस सेक्टर में सुधार लागू किए गए थे। उनके मुताबिक, इन सुधारों के तहत ISRO को प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप कंपनियों को सहयोग देना और देश के स्पेस इकोसिस्टम को बढ़ाना है। 3. हर साल 50 लॉन्च व्हीकल का लक्ष्य: भारत की बढ़ती अंतरिक्ष जरूरतों पर नारायणन ने कहा, देश की जरूरत हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल की है। हमें आगे बढ़ना होगा। 43 साल पहले जब वे ISRO में आए थे, तब 3 साल में एक लॉन्च होता था। ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने 7 सवाल उठाए थे ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा था। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी रविवार को सामने आई थी। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि सरकारी संस्थानों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत संगठन बना रहना चाहिए। इसे केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RD) संस्था तक सीमित न कर दिया जाए। ISRO के अंदर उठा विवाद, 3 पॉइंट में समझें… क्यों उठे सवाल: 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका ने एक कार्यक्रम में कहा कि आखिरकार ISRO कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या PSU करेगा। IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, मंजूरी देने और उनकी निगरानी का काम करता है। ISRO कर्मचारियों की मांग: कर्मचारी संगठन ने कहा कि ISRO की तकनीक, टेस्ट फैसिलिटी और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर जनता के पैसे से तैयार हुए हैं, इसलिए इन्हें निजी कंपनियों को देने की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप: जयराम रमेश ने X पर लिखा कि स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के नाम पर मोदी सरकार ISRO की भूमिका कम कर रही है। उन्होंने कहा कि ISRO की बनाई तकनीक और क्षमता निजी कंपनियों को दी जा रही है। जिनका भविष्य क्या होगा, किसी को नहीं पता। अब जानिए ISRO के बारे में, 57 साल पहले बना था ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका पूरा नाम इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है। ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु में है। ISRO की स्थापना में डॉ. विक्रम साराभाई की सबसे अहम भूमिका थी। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। इससे पहले 1962 में INCOSPAR बनाया गया था जिसकी अगुआई भी विक्रम साराभाई ने की थी। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ा, 10 महीने में 100 इस्तीफे इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें… ये खबर भी पढ़ें: कर्मचारियों का सवाल- क्या ISRO रॉकेट नहीं बनाएगा:9 संगठनों ने प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा; कांग्रेसी बोली- साराभाई की विरासत खत्म की जा रही ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर…
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