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    इंटरनेशनल सट्‌टा गैंग से जुड़े 8 शातिर अरेस्ट:कानपुर में साइबर ठगी की रकम सट्‌टे में खपा रहे, 3 महीने में 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन

    6 hours ago

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    कानपुर पुलिस ने बेटिंग एप से जुड़े आठ शातिरों को अरेस्ट कर लिया। जांच में सामने आया कि पकड़े गए शातिर एप पर सट्‌टा खिलाने वाले इंटरनेशन गैंग से जुड़े हुए हैं। पकड़ा गया गैंग सट्‌टा गिरोह के लिए रुपए विड्रॉल का काम करता था। पकड़े न जाएं इस वजह से गैंग के सदस्य ओला या ऊपर या किराए की टैक्सी में बैठकर सट्‌टा जीतने वालों को ऑनलाइन पेमेंट करता था। खास बात ये है कि पकड़े गए शातिर सट्‌टा जीतने वालों को साइबर ठगी की रकम भेजकर उसे खपा रहे थे। पकड़े गए शातिरों के अकाउंट में तीन महीने के भीतर 100 करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन मिला है। खाते में पुलिस ने 50 लाख फ्रीज करा दिया है। पुलिस इन सभी से पूछताछ करके पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास कर रही है। 2 तस्वीर देखिए… बड़ी रकम सट्‌टे में लगाते ही हरा देता, 3 महीने में 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि भारत में प्रतिबंधित होने के बाद भी गेमिंग एप- Lotus365, Reddy Book, KARTIKEY और DUBAI EXH पर सट्‌टा खिलाया जा रहा है। बर्रा थाने की पुलिस ने इनपुट के आधार पर सट्‌टा गिरोह से जुड़े 8 लोगों को अरेस्ट कर लिया। इन सभी से पूछताछ और जांच में सामने आया कि ये सट्‌टा खिलाने वाले इंटरनेशनल सिंडीकेट से जुड़े हुए हैं। इन सभी को गेमिंग एप से जुड़ने के लिए दुबई, दिल्ली और नोएडा में बैठे बैठे सरगना से आईडी खरीदनी पड़ती है। आईडी मिलने के बाद इस गैंग के सदस्य सट्‌टा खिलवाते हैं। पकड़ा गया सट्‌टा गैंग का नाम ब्रांच-24 है। पकड़े गए सदस्य इस सट्‌टा एप का वो पार्ट हैं जो सिर्फ जीतने वाले को पैसा ट्रांसफर उनके अकाउंट में करते थे। उनके व्हाट्सएप ग्रुप पर डिटेल आती थी और वो जीतने वालों के अकाउंट में पैसा भेजते थे। पकड़े गए सभी सदस्य 25 से 50 हजार रुपए सैलरी प्रति माह नौकरी करते थे। इनको पहले ठगों ने ट्रेनिंग दी और इसके बाद यह उनके एजेंट के रूप में यहां पर काम कर रहे थे। शातिरों ने बताया कि सट्‌टा एप का सोशल मीडिया के जरिए एटवरटाइजमेंट कराते हैं। जो भी लोग एप पर सट्‌टा खेलने आते हैं, उन्हें पहले छोटी-छोटी रकम तो जिता दी जाती है, लेकिन बड़ी रकम लगाते हुए उसे हरा देते हैं। यह एप दिल्ली और दुबई में बैठा सरगना ऑपरेट करता है। यह भी पता चला कि इस गिरोह के चंगुल में कई युवा फंसने के बाद अपने लाखों रुपए हारकर सुसाइड तक कर लिया और हजारों परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। पुलिस को जांच के दौरान इस सट्‌टा एप से जुड़े सदस्यों के पास से 26 बैंक अकाउंट की पासबुक, 79 बैंक अकाउंट की डिटेल, 30 एक्टिव सिम, कार, पकड़े गए सदस्यों के अकाउंट में 50 लाख से ज्यादा कैश, 25 मोबाइल समेत अन्य माल बरामद किया है। जांच के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि शातिरों ने 3 महीने के भीतर 100 करोड़ से ज्यादा की रकम का ट्रांजेक्शन किया है। कैब में बैठकर करते थे पूरा खेल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अगर एक जगह से लगातार बैंक ट्रांजेक्शन या कॉलिंग की जाती है तो पुलिस इस तरह के लोगों को चिन्हित कर लेती है। इस तरह की जगह हॉटस्पॉट के रूप में डेवलप हो जाती है और पुलिस के निशाने पर आ जाते हैं। गैंग के सदस्यों ने पुलिस से बचने के लिए कैब में बैठकर एक जिले से दूसरे जिले चलती हुई गाड़ी में पूरा खेल करते थे। अलग-अलग राज्यों के बैंक अकाउंट और पासबुक मिले पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पकड़े गए गैंग के सदस्यों के पास से अलग-अलग 79 बैंक अकाउंट मिले हैं। करंट अकाउंट को किराए पर लेकर पूरा खेल इन्हीं अकाउंट से करते थे। जांच के दौरान 25 मोबाइल, 1 लैपटॉप, दो डायरी, कैलकुलेटर, 2 पैन कार्ड, वोटर आईडी, डीएल मिले हैं। इसके अलावा 54 एटीएम, तेलंगाना की बैंक की 8 एटीएम और पासबुक, 7 एटीएम और पासबुक पंजाब के, 4 एटीएम और पासबुक मध्यप्रदेश के, 01 एटीएम और पास बुक तमिलनाडु के व 7 एटीएम और पासबुक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलो के भिन्न भिन्न बैंको के अकाउंट और पासबुक मिले हैं। सट्‌टा में खपा रहे साइबर फ्रॉड की रकम पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पकड़े गए शातिरों की जांच में सामने आया कि सट्‌ट में जीतने वाले सदस्य को जो भी रकम यह गैंग भेजता है वह साइबर ठगी की रकम है। डिजिटल अरेस्ट, हनी ट्रैप करके साइबर ठगी, अश्लील फोटो-वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग समेत सैकड़ों तरह से साइबर ठगी करके जो करोड़ों अरबों रुपए भारतीय लोगों से ठगा जा रहा है। साइबर ठग इस रकम को 60 प्रतिशत में बेच देते हैं। जैसे एक उदाहरण के मुताबिक साइबर ठगी से आया हुआ 1 लाख रुपए को 60 हजार रुपए में सट्‌टा एप वालों को बेच देते हैं। वो 60 फीसदी रकम 1 नंबर में अपने खाते में लेते हैं। इधर सट्‌टा गिरोह जो भी लोग सट्‌टा जीतते हैं, उनके खाते में साइबर ठगी की रकम को भेजता है। इसलिए ही आए दिन सट्‌टा खेलने वालों का बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया जाता है। कमाई को डॉलर या बिटक्वाइन में करते हैं कन्वर्ट पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शातिर इस सट्‌टा एप के जरिए आने वाली रकम यानी अपनी कमाई को डॉलर या बिटक्वाइन में कन्वर्ट कर देते हैं। सट्‌टा खेलने वाले लोग अपनी रकम ऑनलाइन जमा करते हैं, जो रकम उन्हें एप में मिलती है उससे ही सट्‌टा खेलते हैं। सट्‌टा खेलने वालों से मिलने वाली रकम को एप सरगना एक नंबर के अकाउंट में लेते हैं क्यों कि वह सिविलियन के बैंक अकाउंट का होता है और ये उस रकम को बिटक्वाइन या डॉलर में फौरन कन्वर्ट कर देते हैं। साइबर एक्सपर्ट की मानें तो भारत में बैन होने के बाद भी एप का क्लोन बनाकर उसके जरिए बड़े पैमाने पर सट्‌टा खिलाया जा रहा है। इस तरह करते थे ठगी अरेस्ट हुए गैंग के सदस्यों के नाम
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