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    इटावा में बरसात से सारस के नेस्ट कम मिले:पिछले साल 47 मिले थे, इस बार सिर्फ 17 नेस्ट ही मिल पाए

    1 hour ago

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    इटावा के अमर प्रेम के प्रतीक माने जाने वाले राज्य पक्षी सारस के प्रजनन पर इस बार भारी बारिश का असर पड़ने का अंदेशा है। उत्तर प्रदेश में सारस के सबसे बड़े प्राकृतिक आवास के रूप में पहचान रखने वाले इटावा में वन विभाग के सर्वेक्षण के दौरान पिछले साल की तुलना में इस बार काफी कम नेस्ट मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि लगातार हुई बारिश के कारण सारस नेस्टिंग साइट बदल सकते हैं। पिछले साल मिले थे 47 नेस्ट, इस बार अब तक 17 जिला वन अधिकारी विकास नायक के अनुसार, भारी बारिश से सारस के प्रजनन पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। बारिश के कारण सारस नेस्टिंग के लिए पहले इस्तेमाल होने वाले स्थानों को बदल सकते हैं। यही वजह है कि वन विभाग के हालिया सर्वेक्षण में अभी तक सिर्फ 17 नेस्ट मिले हैं, जबकि पिछले साल सर्वेक्षण के दौरान 47 नेस्ट मिले थे। वन विभाग की ओर से सारस के नेस्टिंग क्षेत्रों पर निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सर्वेक्षण और निगरानी के दौरान मिलने वाले आंकड़ों से स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इटावा में प्रदेश के सबसे ज्यादा सारस इटावा में सारस की संख्या प्रदेश में सबसे अधिक है। यहां हुई सारस गणना में 3,304 सारस दर्ज किए गए हैं। बड़ी संख्या में सारस की मौजूदगी यहां की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के संरक्षण भाव को भी दर्शाती है। किसानों और ग्रामीणों के बीच सारस के प्रति भावनात्मक लगाव देखा जाता है। राज्य सरकार और वन विभाग भी इसके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। धान के खेत और जल स्रोत बनाते हैं अनुकूल वातावरण सारस को दुनिया का सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी माना जाता है। इसे किसानों का मित्र भी कहा जाता है। करीब 12 किलोग्राम वजन वाले सारस की लंबाई लगभग 1.6 मीटर तक होती है। इसका जीवनकाल करीब 35 से 80 वर्ष तक बताया जाता है। सारस को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में संरक्षण प्राप्त है। दुनिया में सारस की आबादी भारत के अलावा नेपाल, पाकिस्तान, चीन, म्यांमार, कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी पाई जाती है। इटावा में सारस के लिए धान के खेत, तालाब, झील, दलदली क्षेत्र और अन्य जल स्रोत अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। इन स्थानों पर सारस को घास की जड़ें, कृषि खाद्यान्न, छोटी मछलियां, कीड़े-मकोड़े, छोटे सांप, घोंघे और सीप जैसे भोजन आसानी से मिल जाते हैं। इसी कारण इटावा लंबे समय से सारस के प्रमुख प्राकृतिक आवास के रूप में पहचान बनाए हुए है। हालांकि, इस बार भारी बारिश के बाद नेस्ट की कम संख्या ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
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