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    जाजमऊ गंगा पुल 90 दिन के लिए बंद:भारी वाहनों के लिए दोपहर 12 बजे से डायवर्जन लागू, वैकल्पिक मार्ग से लखनऊ से कानपुर जाना होगा

    3 hours ago

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    जाजमऊ पुराने गंगापुल को मरम्मत और स्पैन के बेयरिंग बदलने के लिए NHAI ने 3 महीने के लिए बंद कर दिया है। आज यानी रविवार दोपहर 12 बजे से डायवर्जन लागू कर दिया गया है। अब रोडवेज बस सहित भारी वाहनों को एंट्री नहीं मिलेगी। डायवर्जन की व्यवस्था 13 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। उन्नाव के तीन प्रमुख चौराहों से डायवर्जन लागू कर दिया गया। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की ओर से कानपुर आने वाली 600 से अधिक रोडवेज बसों का रास्ता बदल जाएगा। एनएचएआई के डायरेक्टर पंकज यादव ने बताया- पुराने गंगापुल की मरम्मत के लिए उन्नाव प्रशासन के साथ मिलकर गगनखेड़ा, आजाद मार्ग और त्रिभुवन खेड़ा चौराहों पर बैरिकेडिंग का काम शुरू कर दिया गया है। हाईवे पर भारी यातायात होने के कारण डायवर्जन लागू करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। तीन दिनों तक बड़े वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, जबकि छोटे वाहनों को आवागमन की अनुमति होगी। दबाव बढ़ा तो एनएचएआई बदलेगा प्लान पुराना गंगापुल पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के बाद वैकल्पिक मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। एनएचएआई भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि डायवर्जन के दौरान भारी वाहनों का दबाव बढ़ता है और जाम की स्थिति बनती है, तो दूसरा प्लान अपनाने का विकल्प तलाशा जा रहा है। भारी वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू उन्नाव से औरैया-इटावा जाने वाले वाहन उन्नाव से औरैया और इटावा की ओर जाने वाला भारी वाहन यातायात गंगा एक्सप्रेस-वे से होकर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का प्रयोग करेगा। इसके जरिए वाहन औरैया-इटावा की ओर जा सकेंगे। वैकल्पिक रूप से वाहन उन्नाव के बक्सर मोड़ से कानपुर और आगे औरैया-इटावा की ओर जा सकेंगे। उन्नाव से बांदा-महोबा जाने वाले वाहन उन्नाव से बांदा और महोबा की ओर जाने वाला भारी वाहन यातायात NH-31 से लालगंज और फतेहपुर होते हुए बांदा-महोबा की ओर जाएगा। हमीरपुर, झांसी और उरई जाने का रूट उन्नाव से हमीरपुर, झांसी और उरई की ओर जाने वाले भारी वाहन NH-31 से उन्नाव के बक्सर मोड़ पहुंचेंगे। यहां से NH-19 (चौड़गरा) का प्रयोग करते हुए SH-46 के रास्ते घाटमपुर जाएंगे। इसके बाद NH-34 से हमीरपुर, झांसी और उरई की ओर जा सकेंगे। उन्नाव से कानपुर आने वाले भारी वाहन उन्नाव से कानपुर की ओर आने वाले भारी वाहनों को NH-31 से उन्नाव के बक्सर मोड़ का रास्ता अपनाना होगा। यहां से वाहन कानपुर की ओर जा सकेंगे। 60 किलोमीटर बढ़ जाएगी रोडवेज बस की दूरी पुराने जाजमऊ गंगा पुल की मरम्मत के कारण भारी वाहनों पर रोक लगने से रोडवेज बस से कानपुर की दूरी में 60 किलोमीटर की बढ़ोतरी हो जाएगी। अब बसों को कानपुर पहुंचने में 80 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना होगा। उन्नाव से कानपुर जाने वाली बसों को बिहार बक्सर मार्ग से चौडगरा होकर जाना पड़ेगा। यह दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटे का अतिरिक्त समय लगेगा। परिवहन विभाग के रीजनल मैनेजर महेश कुमार ने बताया- अभी किराया नहीं बढ़ेगा। कुछ दिन वैकल्पिक रूट से बसों के आवागमन के बाद किराया बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। आइए अब पढ़ते हैं जाजमऊ गंगा पुल के हालात के बारे में गड्ढे बचाने में टकराते-टकराते बचे वाहन जाजमऊ गंगा पुल पर बड़े गड्ढों के कारण वाहनों को एक-दूसरे से बचकर निकलना पड़ रहा है। कई जगह वाहन चालक अचानक लेन बदलते दिखाई दिए। इससे टक्कर का खतरा बना रहा। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण स्थिति और बिगड़ गई है। कानपुर की तरफ पुल खत्म होते ही करीब 6-7 मीटर लंबा गड्ढा भी है। बारिश के बाद इसमें पानी भर जाता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है। गड्ढों से निकली सरिया, टायर फटने का खतरा पुल की सड़क कई जगह से पूरी तरह टूट चुकी है। गड्ढों के बीच से आधा फीट से एक फीट तक सरिया बाहर निकल आई है। वाहन चालकों के मुताबिक, सरिया की चपेट में आने से टायर फटने और वाहन के निचले हिस्से के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। भारी वाहन गुजरते हैं तो पुल कांपता है पुल से पैदल गुजरने वाले लोगों ने कई जगह कंपन महसूस होने की बात कही। राहगीर दुष्यंत सिंह, जीशान खान, मुजाहिद और अमित सिंह ने बताया कि भारी वाहन गुजरते हैं तो पुल पर कंपन महसूस होता है। फुटपाथ भी कई जगह टूट चुका है। फुटपाथ के क्षतिग्रस्त हिस्सों में पत्थर लगाए गए हैं, लेकिन उनके बीच काफी अंतराल है। लोगों के मुताबिक, इन अंतरालों में बच्चों और बुजुर्गों के पैर फंसकर चोटिल हो चुके हैं। सुरक्षा रेलिंग भी कई जगह क्षतिग्रस्त है। गंगा में बहते मिले GPS और टेलीफोन के तार ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पुल से जुड़े GPS और टेलीफोन के करीब आधा दर्जन तार गंगा में बहते मिले। राहगीरों का दावा है कि ये तार करीब दो महीने से इसी तरह पड़े हैं। संबंधित विभागों ने अब तक इन्हें हटाने की सुध नहीं ली। गंगा में तारों के बहने से सुरक्षा के साथ पर्यावरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जाजमऊ-रामादेवी फ्लाईओवर भी गड्ढों में गंगापुल के आगे जाजमऊ-रामादेवी फ्लाईओवर की सड़क भी बदहाल है। जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश में सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और बजरी फैल गई है। फिसलन के कारण दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का खतरा बना रहता है। रात में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। अंधेरे में गड्ढे और सड़क पर फैली बजरी नजर नहीं आने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है। बारिश में क्यों उखड़ जाती है सड़क? एनएचएआई के इंजीनियर राजकमल ने बताया कि पुल की पोक लेयर कमजोर होने के कारण कंक्रीट और डामर का मिश्रण टिक नहीं पा रहा है। बारिश होते ही मैटेरियल बह जाता है। इसी वजह से बार-बार सड़क खराब हो रही है। अब पुल के बारे में ग्राफिक्स से जानिए
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