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    जिला अस्पताल में आधे घंटे स्ट्रेचर पर भटकता रहा मरीज:रामपुर में वार्ड बॉय नहीं मिला, तीमारदारों ने खुद पहुंचाया इमरजेंसी तक

    1 day ago

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    रामपुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की एक बार फिर पोल खुल गई। शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि एक बुजुर्ग मरीज को अस्पताल में वार्ड बॉय और बेड की जानकारी नहीं मिलने के कारण तीमारदारों को खुद ही स्ट्रेचर पर इधर-उधर ले जाना पड़ा। करीब आधे घंटे तक परिजन मरीज को लेकर अस्पताल में भटकते रहे, लेकिन उन्हें कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं मिला। कैमरी थाना क्षेत्र के गांव शिमलिया निवासी 65 वर्षीय सुखवासी को सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद न तो मरीज को वार्ड तक पहुंचाने के लिए कोई वार्ड बॉय मौजूद था और न ही किसी ने यह बताया कि किस वार्ड या बेड पर भर्ती किया जाएगा। मजबूरी में परिजनों ने ही मरीज को एंबुलेंस से उतारा, स्ट्रेचर पर लिटाया और एमओटी व इमरजेंसी वार्ड तक लेकर पहुंचे। 'कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं मिला' मरीज के तीमारदार भगवानदास ने बताया कि अस्पताल में मदद के लिए कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। बेड की जानकारी न मिलने के कारण परिवार करीब आधे घंटे तक स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर अस्पताल परिसर में भटकता रहा। एक अन्य तीमारदार ने कहा कि मजबूरी में उन्हें खुद ही स्ट्रेचर खींचकर मरीज को इलाज के लिए ले जाना पड़ा। पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी तस्वीरें यह जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाली पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें तीमारदार मरीजों को गोद, कंधों या जमीन का सहारा देकर इलाज के लिए अस्पताल के भीतर ले जाते दिखाई दिए थे। लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। व्यवस्थाओं पर उठे सवाल बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं मरीजों को समय पर और गरिमापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। अस्पताल प्रशासन बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों और उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग इन कमियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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