Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    जेल में कैदियों को हंसा रहे राजपाल यादव:कानपुर में एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा बोले- भाषा को लेकर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

    9 hours ago

    1

    0

    कानपुर के अर्मापुर पीजी कॉलेज में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिस्सा लेने पहुंचे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और साहित्यकार अखिलेंद्र मिश्रा ने समसामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। 'दैनिक भास्कर' से खास बातचीत के दौरान उन्होंने जहां एक ओर मुश्किल दौर से गुजर रहे अभिनेता राजपाल यादव का मानवीय पक्ष रखा, वहीं दूसरी ओर भाषा और जाति के नाम पर हो रही गंदी राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज की राजनीति समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रही है। इंटरव्यू पर आधारित पढ़े खास रिपोर्ट… सवाल: राजपाल यादव इस वक्त कानूनी और व्यक्तिगत रूप से परेशान हैं। क्या आपकी उनसे बात हुई? जवाब: देखिए, फिलहाल मेरा राजपाल यादव से कोई सीधा संवाद नहीं हुआ है, लेकिन मेरा मानना है कि यह बुरा समय है और जल्द ही टल जाएगा। राजपाल का अपना एक अलग और निखरा हुआ व्यक्तित्व है। वह जहां भी रहते हैं, लोगों को हंसाते रहते हैं। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। वह एक बेहतरीन इंसान और कमाल के एक्टर हैं। सबसे अद्भुत बात तो यह है कि वह जेल में रहकर भी वहां के कैदियों को हंसा रहे हैं। जिसका जो मूल स्वभाव होता है, वह हर परिस्थिति में वैसा ही रहता है। जैसे दिए का काम रोशनी फैलाना है, वैसे ही राजपाल का काम खुशियां बांटना है। जहां तक आर्थिक मदद का सवाल है, बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां मदद के लिए आगे आई हैं क्योंकि यह काफी बड़ा अमाउंट है। लेकिन अगर समय पड़ा और जरूरत लगी कि सभी एक्टर्स को मिलकर कंट्रीब्यूट करना चाहिए, तो मैं भी पीछे नहीं रहूंगा और निश्चित रूप से मदद करूंगा। सवाल: भाषा और राजनीति के बीच जो मौजूदा टकराव दिख रहा है, उसे आप एक कैसे देखते हैं? जवाब: यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले राज्यों को बांटा गया, फिर भाषा के आधार पर दीवारें खड़ी की गईं कि 'यह उस राज्य का है और यह इस राज्य का'। अब राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि लोग धीरे-धीरे जाति पर आ गए हैं और जाति के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है। यह पूरी तरह से राजनीति है, हालांकि हमारा यह काम नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि भाषा से ही इंसान के व्यक्तित्व का निर्माण होता है और भाषा से ही देश का निर्माण होता है। मेरा राजनेताओं और समाज से यही कहना है कि भाषा पर राजनीति न करते हुए इसके संरक्षण और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाए। सवाल: बॉलीवुड में आपके लंबे करियर के दौरान आपने क्या बदलाव महसूस किए हैं? जवाब: बदलाव केवल सोच और व्यवहार का है। प्रकृति के तीन गुण है। सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण। आज के दौर में सतोगुण और रजोगुण कम हो गए हैं और तमोगुण (तामसिकता) बहुत ज्यादा बढ़ गया है। लोग तामसिक कार्यों में ज्यादा रुचि ले रहे हैं और इसका सीधा असर सिनेमा पर दिख रहा है। यही वजह है कि आज की भारतीय फिल्मों से 'भारत' ही गायब हो गया है। सवाल: दर्शकों के लिए आपकी कौन सी नई फिल्में और प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं? जवाब: हाल ही में 'किस-किस को प्यार करूं 2' आई है, जिसमें मैंने कपिल शर्मा के पिता का रोल किया है। कपिल के साथ काम करना वाकई मजेदार था। इसके अलावा नेटफ्लिक्स पर मेरी फिल्म 'बंसल मर्डर: रात अकेली है 2' और वेब सीरीज 'पिरामिड' आने वाली है। एक बहुत ही महत्वपूर्ण फिल्म मैंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर की है। 'बोस: द बिगेस्ट अंडरकवर एवर'। यह अनुज धर की किताब पर आधारित है और उनकी गुमनामी के अनछुए पहलुओं को दिखाएगी। साथ ही दहेज प्रथा पर 'मेरे पापा मैंने' और ग्रामीण परिवेश पर 'द विलेजेस' जैसी फ़िल्में भी कतार में हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    मेरठ कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी:कैंपस को खाली कराया, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड टीम जांच कर रही
    Next Article
    ओबीसी महासभा ने सुल्तानपुर में किया प्रदर्शन:जातिगत जनगणना, क्रीमीलेयर हटाने सहित 22 सूत्रीय मांगें रखीं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment