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    जालौन स्कूल कर्मचारी हत्या केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:बसपा के पूर्व विधायक के बेटे को रिहा करने का आदेश, रिमांड और गिरफ्तारी को अवैध बताया

    1 hour ago

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    जालौन के चर्चित स्कूल कर्मचारी हत्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मार्च को अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा मोड़ ला दिया। खंडपीठ ने बसपा के पूर्व विधायक अजय कुमार सिंह के बेटे, आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की की गिरफ्तारी और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड आदेश को अवैध करार देते हुए तत्काल हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और रिमांड मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण तलब करने के भी निर्देश दिए। यह आदेश जज सिद्धार्थ और जज जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने अमन कुमार सिंह द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में कोतवाली कोंच, जिला जालौन में दर्ज केस क्राइम नंबर 179/2025 में की गई गिरफ्तारी और 6 सितंबर 2025 को पारित रिमांड आदेश को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी। गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता दया शंकर मिश्रा और अधिवक्ता चंद्रकेश मिश्रा ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी ज्ञापन पुलिस महानिदेशक के परिपत्रों के अनुरूप नहीं था। कई महत्वपूर्ण कॉलम जांच अधिकारी द्वारा खाली छोड़े गए थे, जिससे पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। उन्होंने हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय ‘उमंग रस्तोगी बनाम राज्य’ का हवाला भी दिया। राज्य और शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलें शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शांडिल्य और वैभव शांडिल्य ने दलीलों का विरोध किया, वहीं राज्य की ओर से एजीए ने अपना पक्ष रखा। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हैं और सुप्रीम कोर्ट के ‘गौतम नवलखा बनाम एनआईए’ (2022) फैसले के अनुसार, रिमांड आदेश अवैध होने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की जा सकती है। जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई अदालत ने 6 सितंबर 2025 के गिरफ्तारी ज्ञापन और रिमांड आदेश को निरस्त कर दिया। अमन कुमार सिंह को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जालौन को जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और 25 मार्च 2026 तक अदालत में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के भी आदेश दिए गए। रिमांड मजिस्ट्रेट से भी मांगा स्पष्टीकरण हाईकोर्ट ने ओराई स्थित रिमांड मजिस्ट्रेट/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से यह स्पष्टीकरण मांगा है कि संबंधित न्यायालय के निर्णय का पालन क्यों नहीं किया गया और बिना पर्याप्त विचार के रिमांड आदेश क्यों पारित किया गया। अदालत ने मामले को 25 मार्च 2026 को पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए।
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