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    जालियांवाला बाग बरसी पर क्रांतिवीरों को न्याय की मांग:इटावा में स्मारक निर्माण का मुद्दा गरमाया, मुख्यमंत्री-राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

    1 hour ago

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    इटावा में जालियांवाला बाग बरसी पर चंबल के क्रांतिवीरों को न्याय दिलाने की मांग उठी। चंबल संग्रहालय पंचनद परिवार ने एक कार्यक्रम आयोजित कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। इसमें क्रांतिकारियों की स्मृतियों के संरक्षण और स्मारक निर्माण की मांग की गई। कार्यक्रम के दौरान कचहरी परिसर 'क्रांति नायकों को न्याय दो' और 'स्मृतियों को जीवंत करो' जैसे नारों से गूंज उठा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आजादी के दशकों बाद भी चंबल घाटी के हजारों क्रांतिकारियों को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला है। उन्होंने विशेष रूप से जीता चमार, मारून सिंह लोधी और जंगली-मंगली भंगी के नाम पर स्मारक बनाने की मांग की। शहीद वंशज देवेंद्र सिंह चौहान एडवोकेट ने स्वतंत्र भारत की सरकारों पर चंबल के क्रांतिकारियों के इतिहास को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इटावा से कई बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। चंबल परिवार प्रमुख डॉ. शाह आलम राणा ने सैफई स्थित विश्वविद्यालय का नाम क्रांतिकारी जंगली-मंगली भंगी के नाम पर रखने की मांग भी उठाई। योगदान को प्रमुखता से रेखांकित किया ज्ञापन में 1857 के योद्धा जीता चमार के योगदान को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। बताया गया कि उन्होंने गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से अंग्रेजों को कई इलाकों में चुनौती दी और अंत तक संघर्षरत रहे। मारून सिंह लोधी की वीरता का भी उल्लेख किया गया, जिन्हें अंग्रेजों ने 1860 में 'बेहद खतरनाक' मानते हुए फांसी दे दी थी। कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि 14 अप्रैल 2026 को अंबेडकर जयंती के अवसर पर इटावा के बुद्धा पार्क में 'क्रांतिकारी जीता चमार स्मरण सभा' आयोजित की जाएगी। आयोजकों ने इसमें बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की है। चंबल की धरती को बताया वीर प्रसूता, इतिहास सहेजने पर जोर सभा में मौजूद वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि चंबल घाटी हमेशा से अन्याय के खिलाफ खड़ी रही है और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि इन गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाओं को संरक्षित करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और बलिदान पर गर्व कर सकें।
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