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    जामा मस्जिद के सदर और ट्रस्ट अध्यक्ष में विवाद:'किराए को रिश्तेदारों के साथ बांटते हैं जफर अली', 'घर में घुसकर चंदा वसूलते हैं काशिफ'

    12 hours ago

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    संभल की शाही जामा मस्जिद में एक नया विवाद सामने आया है। मस्जिद के सदर जफर अली और ट्रस्ट अध्यक्ष काशिफ खान एक-दूसरे पर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। यह विवाद तब गहराया जब सदर जफर अली ने काशिफ खान पर फर्जी ट्रस्ट बनाने और अवैध चंदा वसूली का आरोप लगाया था। ट्रस्ट अध्यक्ष काशिफ खान, जो संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के पंजू सराय के निवासी हैं, ने जफर अली के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि मस्जिद ट्रस्ट का कैनरा बैंक खाता शुरुआत से ही घाटे में चल रहा है। काशिफ खान ने मस्जिद की संपत्ति में शामिल मुसाफिरखाने का जिक्र किया, जिसमें 52 दुकानें हैं। उनके अनुसार, इन दुकानों का मासिक किराया मात्र 300 रुपये लिया जा रहा है, जबकि मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण इनका वास्तविक किराया 5,000 से 10,000 रुपये होना चाहिए। काशिफ खान ने यह भी आरोप लगाया कि जफर अली के एक रिश्तेदार हसनपुर जाने वाली निजी बसों को मुसाफिरखाने में खड़ा करवाते थे। इससे प्रतिमाह 50-60 हजार रुपये की आय होती थी, जिसे जफर अली अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर बांट लेते थे। अपने ऊपर लगे चंदा चोरी के आरोपों का खंडन करते हुए काशिफ खान ने स्पष्ट किया कि उनके ट्रस्ट में कोई पैसा नहीं आया है। उन्होंने कहा कि कोई भी उनके अकाउंट स्टेटमेंट की जांच कर सकता है। काशिफ खान ने जफर अली पर पलटवार करते हुए उन्हें ही वित्तीय अनियमितताओं का जिम्मेदार ठहराया। काशिफ खान ने सदर जफर अली के पद की वैधता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि जफर अली सदर हैं, तो वे मुसाफिरखाने के दुकानदारों से किराया क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं। काशिफ खान ने दावा किया कि जफर अली कहीं भी लिखित में सदर नहीं हैं, क्योंकि कोर्ट सबूत मांगती है, केवल हाथ उठाने से कोई सदर नहीं बनता। जफर अली ने काशिफ खान पर मस्जिद में अवैध तरीके से घुसकर चंदा वसूली करने का आरोप लगाया है। पूरा संभल उनकी हकीकत को जानता है, ट्रस्ट कोई भी बन सकता है लेकिन मस्जिद को इंतजामिया कमेटी ही देखती है।
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