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    जैन धर्मालुओं ने अक्षय तृतीया पर आदिनाथ पूजन किया:दान का पर्व मनाते हुए मंदिरों में अभिषेक और इच्छुरस का आहार दान

    3 hours ago

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    ललितपुर में जैन धर्मालुओं ने रविवार को अक्षय तृतीया का महापर्व श्रद्धापूर्वक मनाया। इस अवसर पर जैन मंदिरों में प्रातःकाल अभिषेक पूजन के बाद भगवान आदिनाथ का पूजन कर अर्घ समर्पित किए गए। श्रावकों ने निकटवर्ती स्थानों पर विराजमान मुनिराजों को आहारदान कर पुण्यार्जन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा ऋषभदेव ने मुनिदीक्षा धारण करने के बाद छह माह का उपवास किया था। आहारचर्या के लिए निकलने पर उन्हें नवदाभक्ति पूर्वक आहार की विधि नहीं मिल पाई, जिससे उनका पडगाहन नहीं हो सका। सात माह और नौ दिन के उपरांत अक्षय तृतीया को हस्तिनापुर नगरी में राजा श्रेयांस के यहां मुनिराज का प्रथम आहार हुआ, जिसमें उन्होंने मात्र इच्छुरस ग्रहण किया। तभी से जैन धर्मालु अक्षय तृतीया को 'आखा तीज' के रूप में मनाते हैं और इसे दान का पर्व मानते हैं। राजा श्रेयांस को 'दानतीर्थ के प्रवर्तक' के रूप में जाना जाता है। नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पाठशाला परिवार के बच्चों ने भारतीय वेशभूषा में पूजन संपन्न कराई। इस अवसर पर बच्चों को स्वल्पाहार में इच्छुरस वितरित किया गया। मंदिर प्रबंधक जिनेन्द्र जैन रजपुरा और मनीष जैन (फोटो) ने बच्चों को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रीति जैन, गुंजा जैन, दीपा जैन, श्यामली जैन, महक जैन और टीसा जैन ने किया। इस मौके पर मनोज जैन जड़ीबूटी, संतोष जैन, विमल जैन पारौल, अनिल जैन अलया, अनुराग जैन सिंघई, मनोज जैन कलपुर्जे, राजकुमार जैन, विकास खजुरिया, सुरेन्द्र जैन कुडावनी, विमल जैन डुगारसा, ऋषभ जैन रजपुरा और सतीश जैन सहित अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे। अक्षय तृतीया पर अनेक श्रावकों ने निकटवर्ती टीकमगढ़ में विराजमान चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्धसागर महाराज, मध्य प्रदेश के भानगढ़ में विराजमान तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज और चंदेरी नगर में निर्यापक मुनि अभयसागर महाराज सहित अन्य साधुसंघों में पहुंचकर दर्शन लाभ लिया और आहारदान किया। कई श्रावकों ने अपने आवास पर परोक्ष रूप से दिगम्बर साधुओं का 'नमोस्तु नमोस्तु' की भावना से पडगाहन किया। उन्होंने यह भावना की कि उनके घर ऋद्धिधारी मुनिराज का पदार्पण हुआ है और उन्हें आहारदान कर पुण्य मिला है।
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