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    ज्ञानवापी मूलवाद में पक्षकार हटाने पर सुनवाई आज:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं को पूजा के अधिकार केस में रोक की मांग की थी

    8 hours ago

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    ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े साल 1991 के एक मुकदमे में मंगलवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) सुरभि अग्रवाल सुनवाई करेंगी। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से हुई बहस के बाद कोर्ट ने आज की तारीख तय की थी। मामले में कई दिन से दोनों पक्ष अपनी दलील दे रहे थे। मामले में प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने की अर्जी दी गई थी। वहीं, वादी की तीनों बेटियों की ओर से वादमित्र को हटाने संबंधी अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। पक्षकार बनने संबंधित अर्जी में बेटियों की ओर से संशोधन करना है। मामलों की अग्रिम सुनवाई पर रोक लगा रखी है उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अर्जी में दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय की याचिका पर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत सभी विवादित मामलों की अग्रिम सुनवाई पर रोक लगा रखी है। इस वजह से मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई विशेष आदेश नहीं दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही छह माह के भीतर मुकदमे के निस्तारण का आदेश दे चुका है, जिसके तहत त्वरित सुनवाई चल रही है। विजय शंकर इस वाद में अनावश्यक और अनुचित पक्षकार याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि विजय शंकर इस वाद में अनावश्यक और अनुचित पक्षकार हैं। इन्हें हटाना बहुत आवश्यक है। वादमित्र के शासकीय कार्यकाल के दौरान भी उनकी शैली पर सवाल उठे थे और इस मामले में भी अपने हित साधने के लिए अनावश्यक रूप से विधि का दुरुपयोग करते हुए वादमित्र नियुक्त कराया गया। कहा गया कि वादी संख्या पांच, जो एक प्राइवेट ट्रस्ट है, उसके सचिव स्वयं वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ही हैं। वादमित्र ने कोर्ट में दलील दी थी कि वादी रहे हरिहर पांडेय के आवेदन के आधार पर 11 अक्टूबर 2019 को वादपत्र में संशोधन के ज़रिये विजय शंकर रस्तोगी को वादमित्र और वादी संख्या पांच बनाया गया है। हरिहर पांडेय की वर्ष 2023 में मृत्यु हो गई हरिहर पांडेय की वर्ष 2023 में मृत्यु हुई थी। हालांकि वर्ष 2023 में उन्होंने अपने दो पुत्रों को वादी संख्या छह और सात बनाने की अर्जी दी थी। इस दौरान एक बार भी किसी ने विरोध नहीं किया। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिला जज की अदालत ने भी सील वजूखाने के ताले पर कपड़ा बदलने से जुड़े मामले में प्रशासन की अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। यह मामला ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने से जुड़े 1991 में दायर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने संबंधी प्रार्थना पत्र से संबंधित है, जिस पर सुनवाई जारी है।
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