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    Justice Yashwant Varma केस में FIR और CBI जांच की मांग खारिज, Delhi High Court ने बताया Witch Hunt

    32 minutes ago

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने और बाद में उसे हटाए जाने के मामले में FIR दर्ज करने और CBI या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी। जस्टिस अमित बंसल ने याचिकाकर्ता, वकील घनश्याम उपाध्याय के अधिकार (locus) पर सवाल उठाया और कहा कि उनके पास दिल्ली पुलिस और उसके बाद सक्षम मजिस्ट्रेट के पास जाने का दूसरा रास्ता मौजूद है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की: "मैं इस पर सुनवाई नहीं कर रहा हूं। यह बिना किसी ठोस आधार के किसी को फंसाने की कोशिश (witch hunt) है। क्या आपके पास करने के लिए कोई बेहतर काम नहीं है? इसके बाद कोर्ट ने उपाध्याय को याचिका वापस लेने और कानून के मुताबिक सही उपाय अपनाने की इजाज़त दे दी। इसे भी पढ़ें: Vijayawada में DSC भर्ती पर भारी बवाल, YSRCP ने Nara Lokesh से मांगा इस्तीफा और CBI जांचखुद पेश हुए उपाध्याय ने FIR दर्ज करने और मार्च 2025 में आग लगने के बाद जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से करेंसी की कथित मौजूदगी, कस्टडी और गायब होने की CBI या SIT से स्वतंत्र जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि संज्ञेय अपराधों का खुलासा करने वाली सामग्री होने के बावजूद आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई न करना मनमाना था और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन था। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपलब्ध सामग्री FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने के लिए ज़रूरी "महज़ शक की हद से कहीं ज़्यादा" थी। याचिका में यह भी कहा गया कि इन-हाउस कमेटी और कानूनी जांच कमेटी के निष्कर्षों को भले ही अपने आप में आपराधिक अपराध का सबूत नहीं माना जा सकता, लेकिन वे यह तय करने के लिए अहम सामग्री थे कि क्या संज्ञेय अपराधों का उचित संदेह था, जिसके लिए आपराधिक जांच मशीनरी को सक्रिय करने की ज़रूरत थी।इसे भी पढ़ें: BCI विवाद: Delhi High Court ने कहा- FIR और जांच के लिए BNSS के तहत मजिस्ट्रेट जाएंयाचिकाकर्ता ने करेंसी के कथित स्रोत, मालिकाना हक, कस्टडी और गायब होने की जांच की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने आग लगने के बाद अहम सबूतों को ज़ब्त न करने और उन्हें सुरक्षित न रखने का मुद्दा भी उठाया। याचिका के अनुसार, 14-15 मार्च, 2025 की रात को नई दिल्ली में 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम/आउटहाउस में आग लग गई थी। आरोप है कि आग बुझाने और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई के दौरान जली हुई और आंशिक रूप से जली हुई करेंसी देखी गई थी और उसकी तस्वीरें व वीडियो भी बनाए गए थे। सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार और CBI की ओर से पेश स्टैंडिंग काउंसिल प्रेमतोष कुमार मिश्रा ने याचिका का विरोध किया और कहा कि याचिकाकर्ता के पास इस मामले में कार्यवाही आगे बढ़ाने का कोई अधिकार (locus standi) नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उपाध्याय पहले सुप्रीम कोर्ट जा चुके थे और उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। मिश्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास अपनी शिकायत लेकर दिल्ली पुलिस और उसके बाद सक्षम मजिस्ट्रेट के पास जाने का विकल्प मौजूद था।
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