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    कानपुर में 50 हजार स्टूडेंट की थाली से तवा-रोटी गायब:कोचिंग मंडी में 25% टिफिन के रेट बढ़े; अब बच्चे को मिल रही तंदूरी रोटी

    7 hours ago

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    ‘स्टूडेंट तवा रोटी ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन जब से गैस मिलना बंद हुई है, तब से हम छात्रों के लिए कोयले पर तंदूरी रोटी बनाने लगे हैं। जो बच्चा पहले 5 रोटी खाता था, अब 3 रोटी ही खाने लगा है।’ यह कहना है कानपुर की कोचिंग मंडी काकादेव में ओम भोजनालय चलाने वाले कौशलेन्द्र का। उन्होंने कहा- गैस ना मिलने से बच्चो के टिफिन में 25% रेट बढ़े हैं। इससे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह हालत केवल एक भोजनालय, रेस्टोरेंट या ढाबे की नहीं है, बल्कि कोचिंग मंडी के करीब 50 से ज्यादा ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों की है। आखिर ये संचालक बिना गैस सिलेंडर के काम कैसे चला रहे हैं? इसका छात्रों के जीवन पर क्या असर पड़ रहा है? गैस सिलेंडर न मिलने के कारण मेन्यू और रेट में क्या बदलाव किए गए हैं? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने कानपुर की सबसे बड़ी कोचिंग मंडी पहुंचकर ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों से बात की। देखिए 2 तस्वीरें… एक नजर काकादेव कोचिंग मंडी पर स्टूडेंट्स की थाली 10 रुपए महंगी हुई काकादेव में कृष्णा भोजनालय के संचालक अभिषेक शुक्ला अपनी दुकान में खाली बैठे मिले। अभिषेक शुक्ला ने बताया- गैस सिलेंडर की बहुत किल्लत हो गई है। गैस एजेंसी वाले सिलेंडर देने से मना कर रहे हैं, जबकि बाहरी लोग 2500 रुपए तक में सिलेंडर दे रहे हैं। हम लोग पहले बच्चों को 2200 रुपए में 60 डाइट देते थे, जिसकी कीमत अब बढ़कर 2600 रुपए हो गई है। यानी छात्रों की एक थाली पर करीब 10 रुपए का इजाफा करना पड़ा है। 5 रोटी की जगह तीन रोटी खाने लगे बच्चे काकादेव में ओम भोजनालय चलाने वाले कौशलेन्द्र ने बताया- बच्चे रात में पढ़ते है। इसलिए तवा रोटी ज्यादा पसंद करते है। क्योंकि बच्चों को पचाने में कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन मजबूरी है कोयले पर तंदूरी रोटी ही बन पाती है। इसलिए अधिकतर 5 पांच रोटी खाने वाले बच्चे 3 और 6 रोटी खाने वाले बच्चे 4 रोटी खाने लगे है। पहले हम 5 किलो कोयले में किचन का काम चला लेते थे, लेकिन अब 25 किलो कोयला लग रहा है। सिलेंडर न मिलने की वजह से कोयले का रेट भी 16 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 18 रुपए प्रति किलो करना पड़ा है। हमारे यहां अधिकतर कोचिंग पढ़ने वाले छात्र ही खाना खाते हैं। लेकिन अब पूरा काम कोयले पर आ गया है। अगर कोयले के रेट और बढ़ गए, तो हमारे पास दुकान बंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर काकादेव की कोचिंग मंडी पर भी पड़ा है। 2600 रुपए में सिलेंडर मिल रहा कौशलेन्द्र के मुताबिक बाजार में सिलेंडर 2000 से 2600 रुपए तक में मिल रहा है। महंगा होने की वजह से उन्होंने सिलेंडर लेना बंद कर दिया है। गैस की जमाखोरी करने वाले दलाल ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से 3000 से 3500 रुपए तक में सिलेंडर बेच रहे हैं। इसी कारण अब उन्होंने कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। यूपी के शहरों में सिलेंडर के रेट पहले 200 केक बिकते थे, अब काउंटर खाली वहीं काकादेव में बेकरी चलाने वाले शनि सूटर ने बताया- बाजार में सिलेंडर 2500 से लेकर 4500 रुपए तक में मिल रहा है। ऐसे में हम किसी तरह काम चला पा रहे हैं। पहले हमारी दुकान पर केक खरीदने के लिए हमेशा भीड़ रहती थी और रोज करीब 200 केक बिक जाते थे। लेकिन अब सिलेंडर न मिलने के कारण माल तैयार नहीं हो पा रहा है, क्योंकि केक का बेस गैस ओवन में बनता है। गैस न होने की वजह से हम अपने ग्राहकों को सामान नहीं दे पा रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि गैस वितरण की प्रक्रिया पहले की तरह जल्द शुरू की जाए। इस समय बाजार में सिलेंडर 2500 से 4500 रुपए तक में मिल रहा है, जबकि एजेंसियों पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। अब तीन पॉइन्ट में समझिए गैस क्राइसिस का असर कानपुर शहर के पास सरसौल में एजेंसी पर भीड़ लगने के बाद गैस वितरण के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। वहीं जेके मंदिर के पास नजीराबाद पुलिस ने ग्राहकों को एनाउंसमेंट के जरिए गैस वितरण करवाया है। मौके पर पुलिस के बड़े अधिकारी पहुंच गए। जिसके बाद ग्राहकों को समझा बुझा कर शांत कर पाए।
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