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    कानपुर में बारिश की भविष्यवाणी करता है जगन्नाथ मंदिर:गुंबद में लगे पत्थर पर आई बूंदें, लेकिन टपकी नहीं, दावा- इस बार कम होगी बारिश

    13 hours ago

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    कानपुर के घाटमपुर तहसील में बेहटा बुजुर्ग गांव है। यहां पर स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर करीब 4200 वर्ष पुराना है। मान्यता है यह मंदिर मौसम की भविष्यवाणी करता है। मान्यता है, कि मंदिर की छत में लगे पत्थर से पानी की बूंदें जब भगवान जगन्नाथ पर टपकने लगे तो समझ जाइए कि अगले 7 दिनों में अच्छी बारिश शुरू हो जाएगी। इससे मानसून के दस्तक की भी जानकारी पहले ही मिल जाती है। कानपुर के जगन्नाथ मंदिर से दैनिक भास्कर रिपोर्ट पढ़िए… दैनिक भास्कर की टीम कानपुर से 35 किलोमीटर की दूर बेहटा बुजुर्ग गांव स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंची। यहां पर हमारी मुलाकात मंदिर के पुजारी कुड़हा प्रसाद शुक्ला से हुई। उन्होंने हमे बताया कि इसे विश्व का इकलौता मानसून मंदिर कहा जाता है। यहां आसपास के रहने वाले किसान मानसून की अपडेट जानने के लिए मंदिर की गुंबद में लगे पत्थर पर आई बूंदों को देखने आते है। आइए बताते हैं, कि जगन्नाथ मंदिर से मानसून को लेकर क्या संकेत मिल रहे हैं। इस बार कितनी बारिश होने की संभावना हैं...? पत्थर में आई पानी की बूंदें, लेकिन टपकी नहीं जगन्नाथ मंदिर के पुजारी कुड़हा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि इस बार पत्थर पूरी तरह भीगा नहीं है। पत्थर में सिर्फ एक तरफ और बीच में पानी की कुछ बूंदें आई हैं। बूंदें अभी तक जमीन पर नहीं गिरी हैं। इससे साफ है, कि अभी अच्छी बारिश होने में समय लगेगा। गुंबद में लगे पत्थर छोटी-छोटी बूंदों का मतलब हल्की आंधी-बारिश के संकेत हैं। यहां जब बूंदों का आकार छोटा होता है। और पत्थर का एक या दो कोना ही गीला होता है, तो अच्छी बारिश का संकेत नहीं होता। अगर गुंबद से बूंदों के गिरने की स्पीड तेज होती है, तो अच्छी बारिश का संकेत मिलता है। ग्रामीण बोले- एक सप्ताह में मौसम की सटीक जानकारी देगा मंदिर दिनेश शुक्ला ने हमें बताया कि मंदिर की गुंबद में लगे पत्थर से जितनी ज्यादा बूंदें टपकती हैं, उतनी ज्यादा बारिश होती है। जब बारिश होने लगती है, तो गुंबद से बूंदों का टपकना बंद हो जाता है। बूंदों के छोटे-बड़े आकार से भी कम-ज्यादा बारिश का अनुमान लगाया जाता है। ग्रामीण पंकज शुक्ला ने बताया कि पत्थर में कुछ बूंदे आई है। हालांकि यह मानसून आने का संकेत है। एक सप्ताह में अगर पत्थर पर बूंदे ज्यादा नहीं आती है, तो इस बार मानसून कमजोर रहेगा। मंदिर के इतिहास पर विवाद भगवान जगन्नाथ के इस पौराणिक मंदिर के निर्माण को लेकर इतिहासकार और पुरातत्वविदों में मतभेद हैं। गर्भगृह के भीतर और बाहर पत्थर और दीवारों पर जो आकृतियां उकेरी गई हैं, उसके अनुसार इस मंदिर को दूसरी और चौथी शताब्दी के बीच का निर्माण होना बताया जाता है। मंदिर के बाहर बने मोर और चक्र के निशान देखकर कुछ लोग इसे चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के काल का बताते हैं। हांलाकि इसके अलावा मंदिर में उपस्थित अयागपट्ट के आधार पर कई इतिहासकार इस मंदिर को 4000 साल से ज्यादा पुराना बताते हैं। मंदिर में आखिरी बार 11वीं शताब्दी में जीर्णोद्धार कराए जाने की जानकारी मिलती है। पत्थर से मानसून बताने का रहस्य नहीं खोज पाए वैज्ञानिक वैज्ञानिक इस बात का आज तक पता नहीं लगा पाए कि जगन्नाथ मंदिर के गुंबद में ऐसी कौन-सी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। जो मानसून के दस्तक देने की जानकारी देता है। इसे जानने के लिए कई बार महीनों वैज्ञानिकों ने मंदिर के गुंबद में लगे मानसून पत्थर का सर्वे किया। लेकिन, तमाम सर्वे के बाद भी मंदिर के निर्माण और रहस्य का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक पता नहीं लगा सके। वैज्ञानिक बस इतना ही पता लग पाए, कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी यानी एक हजार वर्ष पहले हुआ था। उसके पहले कब और कितने बार जीर्णोद्धार हुए। मंदिर का निर्माण किसने कराया। मंदिर से जुड़ी यह जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी है। उड़ीसा शैली से अलग है जगन्नाथ मंदिर घाटमपुर के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा शैली से अलग है। वहां मंदिरों में भगवान जगन्नाथ के साथ बलदाऊ और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं होती हैं। यहां भगवान जगन्नाथ के साथ में सिर्फ बलराम की छोटी प्रतिमा है। मंदिर के पीछे उकेरी गई दशावतारों में महावीर बुद्ध की जगह बलराम का चित्र है। यहां पर मंदिर की दीवारों पर चौखट में कई प्रकार की कलाकृति उभरी हुई है। शिल्पकारों ने चौखट में कई कलाकृतियां उभरी हुई है। मंदिर की दीवारें 14 इंच मोटी पुरातत्व विभाग से संरक्षित इस मंदिर के निर्माण काल को लेकर भी असमंजस है। मंदिर बाहर से बौद्ध स्तूप जैसा दिखाई देता है। मंदिर की दीवारें करीब 14 इंच मोटी हैं। अणुवृत्त आकार के मंदिर का भीतरी हिस्सा 700 वर्ग फीट का है। मंदिर के प्रवेश द्वार के बगल में एक प्राचीन कुआं और तालाब स्थित है। मंदिर से हर साल निकलती है रथयात्रा हर साल देश और विदेश में आयोजित की जाने वाली रथयात्रा का उत्सव कानपुर के इस मंदिर में भी धूमधाम से मनाया जाता है। प्रतिवर्ष 20 जून को भव्य रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा बेहटा बुजुर्ग गांव में भ्रमण करने के बाद मंदिर में समाप्त होती है। इस यात्रा में हजारों भक्त शामिल होते है। ------------------------------------
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