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    कानपुर में फर्जी डिग्री गिरोह का एजेंट जेल भेजा गया:सरगना से मिला 7.53 लाख का ट्रांजेक्शन, बैकडेट की बनवाता था मार्कशीट

    14 hours ago

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    कानपुर में 9 राज्यों के 14 यूनिवर्सिटियों की फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करने के मामले में SIT ने हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी के एजेंट विनीत कुमार राय को गुरुवार को जेल भेज दिया है। विनीत का गिरोह के सरगना शैलेंद्र ओझा से एक साल में 7.53 लाख का ट्रांजेक्शन मिला है। डीसीपी साउथ ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि विनीत कई यूनिवर्सिटियों में एजेंट के रूप में काम कर चुका है। उसका काम छात्रों का एडमिशन कराना और फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराना था। मोनाड यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग मैनेजर था विनीत मूलरूप से बिहार के बक्सर जिले का रहने वाला है। वह वर्तमान समय में नोएडा में किराए के मकान में रह रहा था। विनीत ने हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में वर्ष 2023 में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में 60 हजार सैलरी पर ज्वाइन किया था। इस दौरान डेढ़ साल पहले उसकी मुलाकात गिरोह के सरगना शैलेंद्र ओझा से हुई थी। शैलेंद्र ने खुद को कंसल्टेंट बताते हुए बच्चों का एडमिशन कराने की बात कही थी। शैलेंद्र ने करीब 7 एडमिशन भी कराए थे, जिसका उसे कमीशन दिया गया था। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक विनीत इससे पहले राजस्थान, सिक्किम व गुड़गांव के कई कालेजों में काम करता था। 18 फरवरी को छापेमारी के दौरान शैलेंद्र से कार्यालय एक छात्र की बीए की मार्कशीट मिली थी, जो कि मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी कराई गई थी। शैलेंद्र से पूछताछ में विनीत काम नाम सामने आया था। विनीत बैकडेट की भी मार्कशीट, डिग्रियां तैयार कराता, साथ ही यूपी व अन्य प्रदेशों के छात्रों को कॉलेजों में एडमिशन और डिग्रियां उपलब्ध कराने का काम करता था। उसने एलएलबी की पांच मार्कशीट मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी कराई थी। 2011 में यूनिवर्सिटी के प्रबंधक समेत 11 पर दर्ज हो चुकी FIR डीसीपी ने बताया कि मोनाड यूनिवर्सिटी के प्रबंधक बृजेंद्र हुड‌्डा, वाइस चांसलर समेत प्रबंधन के 11 लोगों के खिलाफ 2011 में हापुड़ के पिलखुआ थाने में फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें सभी आरोपी जेल जा चुके है। विनीत से पूछताछ के दौरान एक अन्य एजेंट रोहित शर्मा का नाम सामने आया है, जिसकी तलाश की जा रही है। रोहित पूर्व में मोनाड यूनिवर्सिटी में प्लानिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर मुकदमा दर्ज होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। रोहित के लिए शैलेंद्र और विनीत काम करते थे। SIT की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों की ओर से दी गई मार्कशीट का सत्यापन भी कॉलेज के स्टाफ की ओर से किया जाता था, जिससे कॉलेज स्टाफ की मिलीभगत भी सामने आई है। हालांकि जब SIT डिग्री और मार्कशीट के सत्यापन के लिए गई तो वह उन्होंने इनकार कर दिया। यह था पूरा प्रकरण 18 फरवरी को किदवई नगर पुलिस ने जूही गौशाला चौराहे के पास स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारा था। वहां से पुलिस ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड की 900 से अधिक मार्कशीट और डिग्री बरामद की थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी समेत कई पाठ्यक्रमों की डिग्रियां शामिल थीं। मौके से पुलिस ने चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि यह गिरोह वर्ष 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन और अंकपत्र तैयार करने का धंधा चला रहा था। पुलिस जांच में गिरोह का मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा निकला। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान पुलिस को शैलेंद्र के बैंक खातों में पिछले चार वर्षों में करीब 5 करोड़ रुपये के लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं।
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