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    कानपुर में होली गंगा मेला आज:तिरंगा झंड़ा फहराने के बाद हटिया से निकलेगा रंगों का ठेला, 1 लाख लोग गुलाल उड़ाएंगे

    7 hours ago

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    कानपुर का ऐतिहासिक गंगा मेला मंगलवार को मनाया जा रहा है। कानपुर हटिया होली मेला (गंगा मेला) महोत्सव कमेटी इस वर्ष मेले की 85वीं वर्षगांठ मना रही है। कार्यक्रम का आयोजन हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क में किया जाएगा। सुबह 9:30 बजे तिरंगा झंडा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इस दौरान कानपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर क्रांतिकारियों के शिलालेख पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद पारंपरिक रंगों के ठेले का शुभारंभ किया जाएगा। इन मार्गों से निकलेगा रंगों को ठेला सुबह करीब 10 बजे रज्जन बाबू पार्क से रंगों का ठेला निकलेगा, जो शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों से होकर गुजरेगा। यह ठेला सूत बाजार, जनरलगंज, बजाज बाजार, मनीराम बगिया, गया प्रसाद लेन, मेस्टन रोड, चौक, टोपी बाजार, सर्राफा बाजार, कोतवाली चौराहा, संगम लाल मंदिर, कमला टावर, फिलखाना, बिरहाना रोड, नयागंज चौराहा, पूरन पान वाला, काहूकोठी, सतरंजी मोहाल, सिरकी मोहाल और लाठी मोहाल होते हुए वापस जनरलगंज से हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क पहुंचेगा, जहां कार्यक्रम का समापन होगा। रूट पर एक लाख से अधिक लोग खेलेंगे होली गंगा मेले के दौरान रास्ते भर लोग अबीर-गुलाल के साथ होली खेलते हुए चलेंगे और शहर की पारंपरिक होली का रंग बिखेरेंगे। आयोजकों के मुताबिक यह मेला कानपुर की ऐतिहासिक परंपरा का प्रतीक है, जो आजादी के पहले से मनाया जाता रहा है। अनुमान है कि पूरे रास्ते भर में होली गंगा मेला में एक लाख से अधिक लोग रंग, गुलाल खेलेंगे। अब पढ़िए होली गंगा मेला क्यों मनाया जाता है? अंग्रेज अफसर ने रोकी थी होली कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप शुक्ला ने बताया- हटिया शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहीं से होली गंगा मेला की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है। कहा जाता है कि सन 1942 में राष्ट्रीय आंदोलन अपने चरम पर था और हटिया स्थित नवजीवन पुस्तकालय इस आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ था। उन दिनों शहर में सात दिनों तक होली मनाने की परंपरा थी, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर ने इस पर रोक लगा दी। कलेक्टर का यह फैसला कांग्रेसियों और क्रांतिकारियों को नागवार गुजरा। इसके विरोध में उन्होंने पार्क में तिरंगा फहराया, होलिका दहन किया और 'भारत माता की जय' जैसे नारों के साथ फागुन के गीत गाते हुए होली का उत्सव मनाया। 43 लोगों को भेजा गया था जेल घटना की जानकारी मिलने पर तत्कालीन कलेक्टर ने पुलिस बल के साथ पार्क को घेर लिया और 43 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में बुद्धलाल मेहरोत्रा, गुलाबचंद्र सेठ, हमीद खान, इकबाल कृष्ण कपूर, बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', शिवनारायण टंडन, रघुवर दयाल भट्ट, जागेश्वर त्रिवेदी और विश्वनाथ मेहरोत्रा समेत कई प्रमुख लोग शामिल थे। इन गिरफ्तारियों के विरोध में शहर के बाजार बंद हो गए और हड़ताल शुरू हो गई। जन दबाव बढ़ने पर आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा करना पड़ा। रिहा होते ही सभी ने खेली थी होली क्रांतिकारियों की रिहाई जिस दिन हुई, उस दिन अनुराधा नक्षत्र था। जेल से बाहर आते ही सभी लोग फिर से होली के रंग और उत्साह में डूब गए। उन्होंने दोगुने जोश के साथ एक-दूसरे पर रंग डाला और होली का उत्सव मनाया। रंग खेलने के बाद दोपहर में सभी लोग गंगा स्नान के लिए गए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर एक-दूसरे से गले मिले। तभी से यह परंपरा शुरू हुई।
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