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    कसारी-मसारी के लोग बोले- नाम बदलने से कुछ नहीं बदलेगा:महिला ने कहा- पहले यहां माफियाओं का खौफ था, सताया जाता था; अब हालात सुधरे

    5 hours ago

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    प्रयागराज का कसारी मसारी इलाका इन दिनों चर्चा में है। असल में सीएम योगी ने इसका नाम बदल कर श्रीकृष्णपुरी कर दिया। खास यह है कि यह इलाका माफिया अतीक अहमद का गढ़ कहलाता रहा है। इस इलाके में अतीक के कब्जे वाली जमीन पर पहले महीनों बुलडोजर चला था। मुस्लिम बहुल्य इस इलाके के नए नामकरण पर कांग्रेस ने विरोध भी जता दिया। दैनिक भास्कर ने कसारी मसारी के स्थानी लोगों से बात। मोहम्मद शाहजहां खान ने कहा- नाम बदलने से कुछ नहीं होगा। पहले भी कई योजनाओं और विकास की बातें हुईं, लेकिन कुछ बना ही नहीं है। अब इसका नाम बदलकर क्या कर लेंगे? उर्मिला ने कहा- पहले घर से बाहर निकलना मुश्किल था। वोट देने तक नहीं निकल पाते थे। यहां पहले माफियाओं का बहुत खौफ हुआ करता था। बहुत जान मारी गई और मारपीट हुई। लेकिन, डर की वजह से कोई कुछ नहीं कह पाता था। लोगों को यहां सताया जाता था, अब हालात सुधरे हैं। कभी इसी जगह से तय होती थी यूपी की सियासत दबी जुबां में लोग कहते हैं- 90 के दशक में यूपी की सियासत इसी कसारी-मसारी और चकिया से तय होती थी। यहां अतीक का सिक्का चलता था, जिधर आंख घूम जाती, उधर की जमीन उसकी हो जाती थी। लेकिन, आज अतीक की ही तरह ये कसारी मसारी भी अतीत बन गया। अब यह श्रीकृष्णपुरी हो गया। चकिया इलाके की पहचान अतीक अहमद के नाम से होने लगी थी। यहीं से उसका आपराधिक और सियासी सफर आगे बढ़ा। अतीक ने 1989 में इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद 1991 और 1993 में भी वह इसी सीट से विधायक बना। 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की, जबकि 2002 में अपना दल के टिकट पर चुनाव जीता। 2004 में वह फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुना गया। इस तरह अतीक ने विधानसभा से लेकर संसद तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाई। चकिया से शुरू हुआ दबदबा, विरोधियों में भी रहा डर अतीक का पुश्तैनी जुड़ाव कसारी-मसारी से था, जबकि बाद में उसका परिवार चकिया में आकर बस गया। धीरे-धीरे चकिया, कसारी-मसारी और आसपास के इलाकों में उसका प्रभाव बढ़ा। उस दौर में उसके खिलाफ खड़े होने वाले स्थानीय नेताओं और विरोधियों के सामने राजनीतिक चुनौती के साथ सुरक्षा का सवाल भी रहता था। 1989 के चुनाव में उसके सामने चांद बाबा भी थे, जिनकी बाद में हत्या हो गई। उमेश पाल हत्याकांड के बाद कसारी-मसारी में महीनों गरजते रहे बुलडोजर उमेश पाल हत्याकांड के बाद महीनों तक आरएएफ और पुलिस कसारी मसारी में तैनात रही। 17 से अधिक घरों में बुलडोजर की कार्रवाई हुई। अतीक, अशरफ समेत उसके कई रिश्तेदारों के घर पर बुलडोजर चले। अतीक से जुड़े हुए गैंग के सभी मेंबरों को गिरफ्तार कर जेल डाला गया, जिसमें 20 से अधिक अभी भी गैंग से जुड़े लोग जेल में हैं। यह लगातार कार्रवाई कसारी मसारी में उमेश पाल हत्याकांड के बाद जारी रही। मुस्लिमों की गद्दी बिरादरी का गढ़ है कसारी-मसारी कसारी-मसारी प्रयागराज के पुराने मोहल्लों में से एक है। माफिया अतीक अहमद का गढ़ यही मोहल्ला था। उसका घर भी पहले इसी मोहल्ले में था, जो बाद में चकिया मोहल्ले के नाम से जाना जाने लगा। कसारी-मसारी मोहल्ले के ही कब्रिस्तान में अतीक और अशरफ के साथ उसके पिता को भी दफनाया गया था। कसारी-मसारी में अतीक की कई पुश्तैनी जमीनें थीं। इसके साथ ही उसके तमाम रिश्तेदार भी इसी मोहल्ले में रहते थे। यह गांव मुस्लिमों की गद्दी बिरादरी का गढ़ माना जाता है। अपनी पुश्तैनी जमीनों पर गद्दी बिरादरी के लोगों ने प्लॉटिंग की, जिन्हें बहुत से हिंदुओं खरीदा और मकान बनवाकर रहने लगे। अब लोगों की बातचीत पढ़िए शाहजहां बोले- नाम बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा मोहम्मद शाहजहां खान ने बताया कि वह यहीं के रहने वाले हैं और वर्ष 1980 से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग इस इलाके को कसारी-मसारी के बजाय चकिया और नई चकिया आबादी के नाम से जानते हैं। नाम बदलकर कृष्णापुरी या लक्ष्मणपुरी कर देने से आम लोगों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आएगा। पहले भी कई योजनाओं और विकास की बातें हुईं, लेकिन जमीन पर कुछ खास नहीं हुआ। उन्होंने इसे वोट की राजनीति बताते हुए कहा कि हर पार्टी ऐसा करती है। योगी आदित्यनाथ के माफिया राज खत्म होने और अतीक के गढ़ को लेकर दिए जा रहे बयानों पर उन्होंने कहा कि नेता जो कहना चाहें, कहें, लेकिन आम आदमी की जिंदगी पहले जैसी ही है। सूफियान बोले- सभी लोग कहेंगे तो हम भी कृष्णापुरी कहेंगे सूफियान ने कहा- कि पुराने समय से यहां रहने वाले लोग इस जगह को पुराने नाम से ही जानते रहेंगे, जबकि बाहर के लोग इसे नए नाम से पहचानेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे इलाहाबाद जंक्शन का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया, वैसे ही यहां भी धीरे-धीरे लोग नए नाम का इस्तेमाल करने लगेंगे। उन्हें नाम बदलने से कोई आपत्ति नहीं है। जब सभी लोग कृष्णापुरी कहने लगेंगे, तो वह भी यही नाम इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कसाइयों का व्यापार अटाला इलाके में होता है, जबकि कसारी-मसारी में हिंदू और मुस्लिम समेत अलग-अलग जातियों के लोग रहते हैं। उनके मुताबिक, नाम बदलने से अपने आप कोई बड़ा बदलाव नहीं आता। पहले माफियाओं का खौफ था, अब हालात बदल गए उर्मिला देवी ने कहा कि वह बचपन से इस इलाके को कसारी-मसारी के नाम से जानती हैं। पहले यहां माफियाओं का बहुत खौफ था। लोगों के साथ मारपीट होती थी और कई लोगों की जान गई, लेकिन डर के कारण कोई कुछ बोल नहीं पाता था। उन्होंने कहा कि पहले लोग घरों से बाहर निकलने और वोट देने तक से डरते थे। लोगों को कई तरह से सताया जाता था। अब हालात काफी बदल गए हैं और इलाके का नाम कृष्णापुरी किए जाने से उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। उनके मुताबिक, पहले के मुकाबले अब स्थिति बेहतर है और नाम बदलने के साथ इलाके में आए बदलाव से वह खुश हैं। जानिए, कसारी-मसारी नाम क्यों पड़ा? इलाके के बुजुर्गों का कहना है कि कसारी और मसारी 2 सगे भाई थे, जो बड़े सूफी संत (फकीर) थे। दोनों मूल रूप से यूपी के फैजाबाद (अयोध्या) के रहने वाले थे। लेकिन बाद में प्रयागराज में आकर रहने लगे थे। लोगों की सेवा करने की वजह से जल्द ही दोनों भाई आम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। दोनों सूफी संतों के निधन के बाद उन्हें इसी इलाके में दफनाया गया। साथ ही उनकी याद में इस क्षेत्र का नाम ही 'कसारी-मसारी' पड़ गया। आज भी यहां स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान को कसारी-मसारी कब्रिस्तान के नाम से जाना जाता है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए- योगी ने अतीक के इलाके कसारी-मसारी का नाम बदला: माफिया की कब्जाई जमीन पर भूमिपूजन किया, गरीबों के लिए 602 फ्लैट बनेंगे सीएम योगी ने माफिया अतीक अहमद के इलाके कसारी-मसारी का नाम बदलकर श्रीकृष्ण पुरी करने का ऐलान किया। योगी ने गुरुवार को प्रयागराज में कहा कि कसारी-मसारी नाम कसाइयों वाला लगता था। इसके साथ ही सीएम योगी ने अतीक और उसके गुर्गों के कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर बनने वाले फ्लैटों का भूमिपूजन किया। पढ़ें पूरी खबर…
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