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    काशी की सड़कों पर निकले नरमुंड, VIDEO:हाथों में परशु के साथ चले भक्त, परशुराम जयंती पर निकली शोभायात्रा में बरसे 11 क्विंटल फूल

    5 hours ago

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    भगवान परशुराम के जन्म जयंती के अवसर पर आज वाराणसी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसका आयोजन ब्रह्म राष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास के तत्वाधान में तथा सेंटर ऑफ सनातन रिसर्च, विश्व हिंदू महासभा एवं धरोहर सेवा संस्थान के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शोभायात्रा रामजन्म योगी की शंख ध्वनि के साथ प्रारंभ हुई यह शोभा यात्रा बीएचयू सिंहद्वार से निकलकर रविदास गेट होते हुए सामने घाट स्थित श्रीकुल पीठ धाम के श्री रामेश्वर मनोकामना महादेव मंदिर के पास सम्पन्न हुई। देखें शोभयात्रा की तीन तस्वीरें.. यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के हाथ में परशुराम जी का शास्त्र परशु भी दिखा। इसके साथ काशी को मांस मदिरा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन से अपील की गई। यात्रा कल 2 किलोमीटर लंबी रही इस दौरान 11 कुंतल पुष्प की वर्षा की गई सभी के हाथों में झंडा भी देखने को मिला जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया इसके अलावा शोभा यात्रा भी निकल गई जिसमें तमाम झांकियां शामिल रही। परशुराम सनातन की रक्षा आज भी कर रहे- सतीश सनातनी सतीश सनातनी ने कहा - परशुराम जी के जीवन, उनके धर्म-संरक्षण के संकल्प और आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होगी, तब-तब प्रभु इस धरती पर अवतरित होकर धर्म की रक्षा करेंगे। भगवान परशुराम आज भी हमारे अस्तित्व में विद्यमान हैं और कल्कि अवतार तक सनातन धर्म की रक्षा करते रहेंगे। अब जानिए कौन हैं भगवान परशुराम भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनके पिता जमदग्नि और माता रेणुका थीं। उनके चार बड़े भाई भी थे। परशुराम चार भाइयों रुक्मवान, सुषेण, वसु और विश्वावसु के बाद थे। वह अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे। परशुराम का असली नाम राम था। भगवान शिव ने उन्हें शस्त्र की विद्या दी थी। लेकिन जब उन्हें भगवान शिव से परशु (फरसा) मिला और उन्होंने उसे धारण किया, तब से वे परशुराम कहलाए। मान्यता है कि उनका अवतार पृथ्वी पर अधर्म और दुष्टों का नाश करने तथा कमजोरों की रक्षा के लिए हुआ था।
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