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    काशी में नवरात्र की तैयारी शुरू, सजने लगा मां शैलपुत्री-दरबार:अलईपुर में है मां का प्राचीन मंदिर, बैरिकेडिंग के साथ ही साथ रंग-रोगन का कार्य अंतिम चरण में

    2 hours ago

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    चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहा है। धर्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि का अपना महत्त्व है। यहां चैत्र नवरात्र में 9 दुर्गा के साथ ही साथ 9 गौरी की भी पूजा का विधान है। प्रथम दिन माता शैलपुत्री के दर्शन का विधान है। मां का मंदिर वाराणसी में वरुणा नदी के तट पर स्थित है। जिसके बारे में काशी खंड में उल्लेख मिलता है कि इसे स्वयं हिमालय ने बनवाया था। जहां आकर उनकी बेटी शैल रहने लगी। मंदिर में दर्शन पूजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। मंदिर के अंदर मौजूद विग्रहों की साफ-सफाई और रंग रोगन किया जा रहा है। साथ ही बैरिकेडिंग नगर निगम द्वारा करवाई गई है। गुरुवार को मंगला आरती के बाद माता के पट दर्शन के लिए खुलेंगे। तैयारियों की देखिये तस्वीरें… हिमालय की पुत्री हैं माता शैलपुत्री मंदिर के पुजारी ने बताया - माता शैलपुत्री का वर्णन काशी खंड में है। ये हिमालय की पुत्री है। कहा जाता है कि भगवान शिव माता शैलपुत्री से ब्याह रचाकर वाराणसी आ गए। जब हिमालय को यह पता चला तो उन्होंने सोचा की एक अघोरी मेरी बेटी को ब्याह कर ले गया है और उसके बाद वो धनधान्य लेकर काशी आये और इसी जगह रुके थे। इसके बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया था। जिसके बाद माता शैलपुत्री ने यहां अपना निवास बना लिया। रंग रोगन और बेरिकेडिंग का कार्य पूरा पुजारी ने बताया - मंदिर में रंग रोगन और बैरिकेडिंग का कार्य लगभग पूरा हो गया है। नगर निगम ने बाहर और अंदर बैरिकेडिंग की है। नवरात्रि के पहले दिन माता के दर्शन का विधान है। सुबह मंगला आरती के बाद माता का पट खुलेगा और आम श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। माता को जो स्वेच्छा से चढ़ाया जाएगा वही माता प्रसन्न होकर अपना लेती हैं। वैसे गुड़हल का फूल माता को अतिप्रिय है।
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