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    काशीपुराधिपति आज कराएंगे मां गौरा का गौना:रंगभरी एकादशी पर पालकी में बिराजेंगे विश्वनाथ, बाबा से मांगेंगे होली की अनुमति

    3 hours ago

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    भगवान काशी विश्वनाथ की काशी में आज भक्ति का आनंद बरस रहा है। काशी पुराधिपति आज मां गोरा का गौना कराकर धाम लाएंगे। प्राचीन परंपरा से शुक्रवार को काशी में रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। शिव और माता गौरा का गौना होगा। काशीवासी और ब्रज के बाल-गोपाल एवं गोपियाँ बाबा के आंगन में पुष्पों की होली खेलेंगे। महाशिवरात्रि के बाद, रंगभरी एकादशी पर यह विशेष रस्म होती है, जिसमें भक्तजन बाबा के भाल पर गुलाल लगाकर और माता पार्वती के चरणों में अबीर अर्पित करके होली खेलने की अनुमति मांगते हैं। इस दिन काशी में होली का उत्सव प्रारंभ होता है। श्रीकाशी विश्वनाथ न्यास द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई और अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई है। महाशिवरात्रि से मंदिरों के बीच शुरू हुए नवाचार के अगले चरण की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देश-विदेश के 50 से अधिक मंदिरों से उपहारों का आदान-प्रदान होगा। महाशिवरात्रि के बाद दूसरे सबसे बड़े महापर्व रंगभरी एकादशी को लेकर प्रशासन की तैयारियां मजबूत हैं। व्यवस्थाओं को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। 27 फरवरी को होने वाली भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के इंतजाम भी चौकस किए गए हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर की शादी के बाद आज कुछ देर में बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराकर उन्हें घर लाया जाता है। इस दिन काशी में उत्सव का माहौल है, और लोग रंग और गुलाल से सराबोर हो जाते हैं। परंपरा के अनुसार, पूर्व महंत जी के आवास से हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बाबा और गौरा का गौना कराकर भक्तों के साथ होली खेली जाती है। पालकी के साथ 64 को अनुमति भक्तों को महादेव की चल प्रतिमा के साथ होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें बाबा की प्रतिमा बाहर से लाई जाती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से, श्रद्धालुओं की संख्या 64 तक सीमित रखी गई है, ताकि सभी भक्त सुरक्षित रूप से इस उत्सव का आनंद ले सकें। रंगभरी एकादशी पर पूर्व महंत के आवास से निकलने वाली शोभायात्रा में पालकी के साथ 64 व्यक्तियों को ही श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। परिवार के साथ हुई सहमति के अनुसार पालकी के साथ केवल 64 चिह्नित व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। इसके अतिरिक्त किसी अन्य को भीड़ का हिस्सा बनने नहीं दिया जाएगा। बाउंड्री वॉल कूदने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष निगरानी और सख्ती बरती जाएगी। मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे। मोबाइल के साथ पाए जाने पर उसे तत्काल जब्त किया जाएगा। हालांकि, मंदिर परिसर के बाहर संपूर्ण धाम क्षेत्र, शिवार्चनम मंच और मंदिर चौक में मोबाइल सहित श्रद्धालुओं के प्रवेश की अनुमति हमेशा की तरह ही रहेगी। न्यास की ओर से श्रद्धालुओं के लिए ठंडई, सूक्ष्म जलपान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। पालकी को परंपरागत शास्त्रोक्त विधि से गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे संकरी गलियों से गुजरने वाली पालकी के मार्ग में अवरोध न उत्पन्न करें, अनावश्यक भीड़ न बढ़ाएं और नियमों का पालन करें। श्री काशी विश्वनाथ धाम और श्री कृष्ण जन्मस्थान के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम रंगभरी एकादशी के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम और श्री कृष्ण जन्मस्थान के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जो काशी और ब्रज के बीच प्राचीन धार्मिक संबंधों को सुदृढ़ करेगा। इस कार्यक्रम में भक्तों को अपने महादेव की चल प्रतिमा के साथ अबीर, गुलाल और रंगों की होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि होली पर्व के अवसर पर भगवान श्री विश्वेश्वर के धाम से श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के लिए पारंपरिक भेंट भेजी गई है, जिसमें अबीर-गुलाल, लकड़ी के खिलौने, चॉकलेट, वस्त्र, पुष्प आदि शामिल हैं। मथुरा से काशी गुलाल यात्रा के साथ 'रसियारों' की एक विशेष टोली काशी आएगी, जो रंगभरी एकादशी के अवसर पर 'शिवार्चनम मंच' से ब्रज के रसियारों द्वारा 'रास' एवं 'फूलों की होली' का भव्य आयोजन करेगी। यह कार्यक्रम ब्रज और काशी की सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण होगा।
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