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    खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर उतरे लोग:शिया समुदाय ने मातम मनाया, अमेरिका-इस्राइल के खिलाफ जताया विरोध

    4 hours ago

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    ​अलीगढ़ में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद से ही शिया समुदाय में मातम पसरा हुआ है। रविवार देर रात एएमयू में नामज-ए-जनाजा करने के बाद सैकड़ों छात्रों ने बाब-ए-सैयद गेट तक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान शिया-सुन्नी भाई भाई के नारे भी गूंजे। इससे पहले जोहराबाग स्थित हुसैनी मस्जिद से शुरू हुआ पैदल जुलूस शहर के विभिन्न रास्तों से होता हुआ यूनिवर्सिटी सर्किल तक पहुंचा। लगभग चार किलोमीटर लंबे इस मार्च में शामिल लोगों के हाथों में खामनेई की तस्वीरें थीं और उनकी आंखें गम से नम थीं। काले कपड़ों में सजे प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस हमले को पूरी इंसानियत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। ​घरों पर लगाएंगे काले झंडे अंजुमन तंजीमुल अजा कमेटी के सचिव सैयद नादिर अब्बास नकवी ने अलीगढ़ में 40 दिन के सामूहिक शोक का एलान किया है। इस अवधि के दौरान शिया समुदाय के लोग अपने घरों पर काले झंडे लगाएंगे और विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिस व श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। शहर के कई इलाकों में लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। रूहानी मार्गदर्शक थे खामनेई प्रदर्शन के दौरान एएमयू के शिया थियोलॉजी विभाग के प्रभारी प्रो. असगर एजाज और अन्य वक्ताओं ने कहा कि खामनेई केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि एक रूहानी मार्गदर्शक थे और उनके जाने से पूरा समुदाय खुद को अनाथ महसूस कर रहा है। पूर्व विदेश मंत्री को भी याद किया गया ​इस विरोध प्रदर्शन में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अली अकबर विलायती को भी याद किया गया, जिनका एएमयू से खास जुड़ाव रहा था। वर्ष 2014 में वे विश्वविद्यालय के 'अली डे' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने ईरान पर हुए इन हमलों को अनुचित बताते हुए प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और बाब-ए-सैयद समेत संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात रहा।
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