Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    खुर्जा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अधूरा:3 किमी कनेक्टिविटी रोड के अभाव में परियोजना बेकार

    2 hours ago

    1

    0

    बुलंदशहर के खुर्जा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) परियोजना अधूरी सोच का शिकार हो रही है। देश की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल इस योजना के तहत अरबों रुपये खर्च कर बनाया गया 'न्यू खुर्जा' स्टेशन आज बुनियादी सड़क के अभाव में लगभग बेकार साबित हो रहा है। एक लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य माल ढुलाई को तेज और सस्ता बनाना था। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि स्टेशन तक पहुंचने के लिए आवश्यक लगभग 3 किलोमीटर लंबी कनेक्टिविटी रोड का निर्माण नहीं हो सका है। इसका परिणाम यह है कि ट्रेन से माल तो आ सकता है, लेकिन उसे आगे पहुंचाने के लिए कोई मार्ग उपलब्ध नहीं है। खुर्जा का यह स्टेशन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। पास में निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की इंडस्ट्रियल सिटी इसे एक मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब में बदल सकते थे। योजना थी कि रेल और एयर कार्गो मिलकर इस क्षेत्र को आर्थिक शक्ति प्रदान करेंगे, लेकिन सड़क न होने के कारण यह पूरी योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। सूत्रों के अनुसार, कनेक्टिविटी रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। स्थानीय अधिकारियों ने इस दिशा में प्रयास किए और जमीन भी चिन्हित की गई, लेकिन जब फंड जारी करने की बारी आई तो दिल्ली स्तर पर प्रस्ताव को रोक दिया गया। इस कारण दो साल की मेहनत और सरकारी प्रक्रिया व्यर्थ हो गई। यह मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि उस व्यवस्थागत खामी को दर्शाता है जहाँ हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं तो बन जाती हैं, लेकिन अंतिम 2-3 किलोमीटर की योजना ही गायब रहती है। इसका सीधा परिणाम यह है कि जनता को कोई लाभ नहीं मिल पाता और सरकारी धन की खुलेआम बर्बादी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी नहीं, बल्कि समग्र योजना और समन्वय का अभाव सबसे बड़ी समस्या है। जब तक 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी', जवाबदेही और जमीनी स्तर से जुड़ी योजना को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे 'अधूरे विकास' की कहानियां सामने आती रहेंगी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    अंग्रेजी में PHD, तीन साल NDA में रहे टीचर:मैले कपड़े भिखारी जैसा हुलिया, अंग्रेजी सुन हैरान रह गए GST कमिश्नर
    Next Article
    यमुना हादसे के 23 दिन बाद शुरू हुआ नाव संचालन:DM-SSP ने रजिस्ट्रेशन पत्र बांटे, सुरक्षा मानक पूरा करने के दिए निर्देश

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment