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    खुद को इस्लामिक देश कहते हो... सेक्युलरिज्म का ज्ञान दे रही थी PAK पत्रकार, मेजर आर्य ने दिया जवाब

    4 hours from now

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    न्यूज18 के खास शो कमांड सेंटर में भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मेजर गौरव आर्य और पाकिस्तानी पत्रकार मोना आलम के बीच तीखी बहस देखने को मिली. बहस की शुरुआत में मेजर गौरव आर्य ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में जमात-ए-इस्लामी की जहरीली भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने पाकिस्तानी जज द्वारा तैयार हमुदूर रहमान कमीशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों का पाकिस्तान क्यों बचाव करता है?इस सवाल पर सीधा जवाब देने के बजाय पाकिस्तानी पत्रकार मोना आलम ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाना शुरू कर दिया और भारत को सेक्यूलरिज़्म और मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने लगीं. मोना आलम के इस पैंतरे पर मेजर गौरव आर्य ने करारा पलटवार करते हुए उनकी बोलती बंद कर दी. मेजर आर्य ने जमीनी अनुभव साझा करते हुए बताया कि कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी और हिजबुल मुजाहिदीन ने मिलकर जहर घोला और पत्थरबाज़ी करवाई, लेकिन आज भारत ने इस विचारधारा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.भारतीय अल्पसंख्यकों की स्थिति पर जवाब देते हुए मेजर आर्य ने कहा कि भारत में मुस्लिम समुदाय से राष्ट्रपति, सशस्त्र बलों के प्रमुख, प्रधानमंत्री, क्रिकेट टीम के कप्तान और बॉलीवुड के शीर्ष सितारे रहे हैं. इसके बाद मेजर आर्य ने सेक्यूलरिज़्म का ज्ञान बांट रही पाकिस्तानी पत्रकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "हमें किसी भी पाकिस्तानी से सेक्यूलरिज़्म का सर्टिफिकेट लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आपके मुल्क का नाम 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' है. जिस दिन आप अपने मुल्क का नाम बदलकर 'सेक्यूलर रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' कर देंगे, उस दिन हम आपकी बात चुपचाप सुनेंगे. एक इस्लामिक देश का नागरिक होकर भारत को सेक्यूलरिज़्म पर लेक्चर देना पूरी तरह हास्यास्पद है."न्यूज18 के खास शो कमांड सेंटर में भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मेजर गौरव आर्य और पाकिस्तानी पत्रकार मोना आलम के बीच तीखी बहस देखने को मिली. बहस की शुरुआत में मेजर गौरव आर्य ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में जमात-ए-इस्लामी की जहरीली भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने पाकिस्तानी जज द्वारा तैयार हमुदूर रहमान कमीशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों का पाकिस्तान क्यों बचाव करता है?इस सवाल पर सीधा जवाब देने के बजाय पाकिस्तानी पत्रकार मोना आलम ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उंगली उठाना शुरू कर दिया और भारत को सेक्यूलरिज़्म और मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने लगीं. मोना आलम के इस पैंतरे पर मेजर गौरव आर्य ने करारा पलटवार करते हुए उनकी बोलती बंद कर दी. मेजर आर्य ने जमीनी अनुभव साझा करते हुए बताया कि कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी और हिजबुल मुजाहिदीन ने मिलकर जहर घोला और पत्थरबाज़ी करवाई, लेकिन आज भारत ने इस विचारधारा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.भारतीय अल्पसंख्यकों की स्थिति पर जवाब देते हुए मेजर आर्य ने कहा कि भारत में मुस्लिम समुदाय से राष्ट्रपति, सशस्त्र बलों के प्रमुख, प्रधानमंत्री, क्रिकेट टीम के कप्तान और बॉलीवुड के शीर्ष सितारे रहे हैं. इसके बाद मेजर आर्य ने सेक्यूलरिज़्म का ज्ञान बांट रही पाकिस्तानी पत्रकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "हमें किसी भी पाकिस्तानी से सेक्यूलरिज़्म का सर्टिफिकेट लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आपके मुल्क का नाम 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' है. जिस दिन आप अपने मुल्क का नाम बदलकर 'सेक्यूलर रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान' कर देंगे, उस दिन हम आपकी बात चुपचाप सुनेंगे. एक इस्लामिक देश का नागरिक होकर भारत को सेक्यूलरिज़्म पर लेक्चर देना पूरी तरह हास्यास्पद है."
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