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    LDA रिश्वत कांड में बाराबंकी में वसूली हुई नाकाम:IGRS शिकायत से बनाया कार्रवाई का दबाव, 15 लाख मांगे; 7.5-7.5 लाख में सौदा तय

    15 hours ago

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    एलडीए के 7.5 लाख रुपए के रिश्वत कांड की जांच में नया खुलासा हुआ है। विजिलेंस और एलडीए से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित बिचौलिया श्रवण कुमार पहले से एनआरआई कारोबारी जितेंद्र नारायण को निशाना बना रहा था। सूत्रों के अनुसार, बाराबंकी में निर्माण कार्य के दौरान कारोबारी से वसूली की कोशिश की गई थी, लेकिन यह सफल नहीं हुई। इसके बाद लखनऊ में कारोबारी की कमर्शियल प्रॉपर्टी को निशाना बनाया गया। आरोप है कि IGRS पर शिकायत के जरिए कार्रवाई का दबाव बनाया गया। फिर 15 लाख रुपए मांगे। बाद में 7.5-7.5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। बाराबंकी में रकम नहीं मिली तो लखनऊ की प्रॉपर्टी पर नजर विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक, एनआरआई कारोबारी जितेंद्र नारायण बाराबंकी में भी निर्माण कार्य करा रहे थे। आरोप है कि उस दौरान कथित बिचौलिया श्रवण कुमार ने उनसे वसूली की कोशिश की थी, लेकिन कारोबारी ने कोई रकम नहीं दी। इसके बाद श्रवण कुमार की नजर लखनऊ के इंदिरानगर स्थित नारायण सिटी की व्यावसायिक परियोजना पर गई। यहां करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में 50 से ज्यादा दुकानों का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक, यह निर्माण करीब चार साल पहले पूरा हो चुका था। इसके बावजूद इसी प्रॉपर्टी को आधार बनाकर कथित तौर पर वसूली की नई योजना तैयार की गई। JE से संपर्क के बाद शुरू हुआ IGRS का खेल जांच में सामने आया है कि श्रवण कुमार ने एलडीए के प्रवर्तन जोन-5 में तैनात जेई दिनेश कुमार वर्मा और अन्य कर्मचारियों से संपर्क साधा। इसके बाद संबंधित निर्माण के खिलाफ IGRS पर शिकायत दर्ज कराई गई। आरोप है कि शिकायत को आधार बनाकर कार्रवाई का डर दिखाया गया और कारोबारी से पहले 15 लाख रुपये की मांग की गई। बाद में सौदा 7.5-7.5 लाख रुपये की दो किश्तों में तय हुआ। पहली किश्त लेते समय विजिलेंस ने जेई दिनेश कुमार वर्मा, पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश और कथित बिचौलिया श्रवण कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। सुपरवाइजर का दामाद भी घूसखोरी के केस में जेल लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के जेई दिनेश कुमार वर्मा, पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश और कथित बिचौलिए श्रवण कुमार की 7.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तारी के बाद जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। अब जांच में एक और चौंकाने वाला इनपुट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश का दामाद भी एक अलग घूसखोरी के मामले में जेल में है। विजिलेंस इस जानकारी के आधार पर आरोपियों के नेटवर्क और पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि, इस दावे पर अभी तक किसी जांच एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अब रिश्तों और संपर्कों की भी पड़ताल जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, विजिलेंस आरोपियों के व्यक्तिगत और पेशेवर संपर्कों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार इसी दौरान यह इनपुट मिला कि गिरफ्तार पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश का दामाद भी एक अलग घूसखोरी के मामले में जेल में है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों मामलों के बीच कोई सीधा या परोक्ष संबंध है या नहीं। फिलहाल इस बिंदु पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। 28 लोगों की 2114 शिकायतों ने बढ़ाया शक एलडीए की आंतरिक समीक्षा में भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पिछले एक वर्ष में केवल 28 लोगों ने 2114 शिकायतें दर्ज कराईं। इसके अलावा 48 ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की गई है, जिनकी शिकायतों का पैटर्न संदिग्ध पाया गया है। एलडीए अब इन मामलों की अलग से जांच कराने और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। विजिलेंस ने मांगीं अवैध निर्माण की पुरानी फाइलें जांच एजेंसी ने एलडीए से अवैध निर्माण से जुड़े मूल नक्शे, जांच रिपोर्ट, नोटशीट और संबंधित अनुभागों के दस्तावेज तलब किए हैं। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन शिकायतों में नियमों का पालन हुआ और किन मामलों में शिकायतों का इस्तेमाल कथित तौर पर वसूली के लिए किया गया। जांच के दायरे में कुछ अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी आ सकते हैं। अब पूरे नेटवर्क की फाइलें खंगाल रही विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस अब यह पता लगा रही है कि यह तरीका सिर्फ एक मामले तक सीमित था या इसी तरह अन्य निर्माणकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया। इसी कड़ी में एलडीए से जेई के कार्यक्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों की पूरी सूची, मूल फाइलें, नोटशीट, जांच रिपोर्ट और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए हैं। मंगलवार को एलडीए ने विजिलेंस को अवैध निर्माण से संबंधित कई मूल फाइलें, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। अब इन रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच होगी कि किन मामलों में शिकायतों का इस्तेमाल नियमों के तहत कार्रवाई के लिए हुआ और किन मामलों में उनका इस्तेमाल कथित रूप से वसूली के लिए किया गया। कई और मामलों के खुलने की आशंका जांच एजेंसियों को आशंका है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में इसी तरह के कई और मामले सामने आ सकते हैं। विजिलेंस अब गिरफ्तार आरोपियों की कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन और IGRS पर दर्ज शिकायतों के पैटर्न का मिलान कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे।
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