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    लोकायुक्त में पूर्व प्राचार्य पर परिवाद, जांच समिति पर सवाल:सुल्तानपुर में कोषाधिकारी की नियुक्ति से हितों का टकराव, स्वतंत्र जांच की मांग

    7 hours ago

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    राजकीय मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव के खिलाफ लोकायुक्त में एक परिवाद दायर किया गया है। इस मामले की जांच के लिए 18 नवंबर 2025 को एक समिति का गठन किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच समिति की संरचना निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। समिति में सुलतानपुर के कोषाधिकारी को सदस्य नियुक्त किया गया है, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कोषाधिकारी महाविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन और लेन-देन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं। वे क्रय समितियों के सदस्य भी हैं और प्राचार्य के साथ मिलकर कई वित्तीय कार्यों पर संयुक्त हस्ताक्षर किए हैं। जांच में क्रय, वित्तीय स्वीकृतियाँ और बजटीय अनुमोदन जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जहां कोषाधिकारी की भूमिका हितों का टकराव पैदा करती है। इसके अतिरिक्त, प्राचार्य से संबंधित निजी चिकित्सालय और अल्ट्रासाउंड केंद्र के अभिलेख मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुलतानपुर कार्यालय में हैं, जिनका वित्तीय नियंत्रण कोषाधिकारी के अधीन आता है। कोषाधिकारी की भूमिका के कारण अभिलेखों की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, जिससे छेड़छाड़ या हस्तक्षेप की संभावना है। यह न्याय के सिद्धांत 'न केवल न्याय किया जाना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए' का उल्लंघन करता है। शिकायतकर्ता बृजेश उपाध्याय ने लोकायुक्त को पत्र लिखकर वर्तमान जांच समिति के गठन पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि यदि जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी हो, तो उसका संज्ञान अस्थायी रूप से स्थगित किया जाए। उपाध्याय ने इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र, बाहरी और प्रभावमुक्त एजेंसी, जैसे मंडलीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारी, विशेष जांच दल या राज्य स्तरीय स्वतंत्र प्राधिकारी से कराने की मांग की है। उन्होंने जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने और किसी भी हस्तक्षेप को रोकने के निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया है।
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