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    लखीमपुर खीरी: दुधवा, छोटी काशी को बजट से निराशा:धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं

    15 hours ago

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    प्रदेश सरकार के हालिया बजट में लखीमपुर खीरी जिले को उपेक्षित रखा गया है। जहां काशी, मथुरा, अयोध्या और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए, वहीं जिले की पहचान माने जाने वाले छोटी काशी गोला और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। इस उपेक्षा से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और आम जनमानस में निराशा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, छोटी काशी गोला वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र है, जबकि दुधवा टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एक महत्वपूर्ण वन्यजीव पर्यटन स्थल है। इन स्थलों के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन विकास या रोजगार सृजन हेतु बजट में प्रत्यक्ष प्रावधान न होना जिले के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल संचालकों, गाइडों और परिवहन व्यवसायियों ने अपनी निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि दुधवा और छोटी काशी को बजट में विशेष पैकेज मिलता, तो जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा होते। इससे स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलता, जिससे सैकड़ों परिवारों को सीधा लाभ हो सकता था। इस बजट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। जहां सत्तापक्ष ने इसे संतुलित और विकासोन्मुख बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे निराशाजनक करार दिया है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामपाल यादव ने आरोप लगाया कि बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं और किसानों के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि हर साल बजट का आकार बढ़ता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाओं का अभाव बना रहता है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि लखीमपुर खीरी प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से एक समृद्ध जिला है। दुधवा टाइगर रिजर्व, छोटी काशी गोला और आसपास के ऐतिहासिक स्थल प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर बड़ी पहचान बना सकते हैं, बशर्ते सरकार योजनाबद्ध निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे।फिलहाल बजट में प्रत्यक्ष घोषणा न होने से जिले के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में मायूसी का माहौल है और वे आने वाले समय में विशेष पैकेज या अलग योजना की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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